देहरादून पेयजल निगम रिश्वत कांड: अधीक्षण अभियंता पर 10 लाख लेने का आरोप, विजिलेंस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश
देहरादून में पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता सुजीत कुमार विकास पर 10 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में विजिलेंस को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद कार्रवाई होगी, साथ ही आय से अधिक संपत्ति की भी जांच चल रही है।
देहरादून में भ्रष्टाचार के मामले में पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता सुजीत कुमार विकास के खिलाफ भी विजिलेंस को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। सुजीत कुमार पर एक ठेकेदार फर्म के पेयजल निगम हल्द्वानी में रजिस्ट्रेशन कराने की एवज में 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। कुमार के खिलाफ भी विजिलेंस की खुली जांच चल रही थी। इसके आधार पर सतर्कता समिति
विजिलेंस को यह आदेश दिए हैं।
पिछले साल 14 जुलाई को सुजीत कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए थे। इसके दो दिन बाद शासन ने तत्कालीन प्रभारी मुख्य अभियंता पेयजल निगम कुमाऊं सुजीत कुमार विश्वास को निलंबित भी कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने हर्ष इंटरप्राजेज नाम की फर्म का निगम में पंजीकरण कराने के नाम पर रिश्वत ली है। रिश्वत की यह रकम पिछले साल जुलाई में ही कुचु पुचु इंटरप्राइजेज नाम की कंपनी के कोटक महिंद्रा बैंक के खातों में दो-दो लाख रुपये की पांच किश्तों में 10 लाख रुपये जमा कराए थे।
इस कंपनी की पार्टनर सुजीत कुमार विकास की पत्नी बताई जाती हैं। हालांकि, उस वक्त सुजीत कुमार ने इस कंपनी से कोई संबंध होने से इन्कार किया था। इससे पहले भी वर्ष 2019 में सुजीत कुमार विकास की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, बाद में वह बहाल हो गए थे। अब इस ताजा मामले में सुजीत कुमार पर आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्राथमिकी का निर्णय लिया गया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का भी आरोप है। विजिलेंस जल्द ही प्राथमिकी दर्ज कर इस मामले की विवेचना शुरू करेगी।
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