राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आठवें वेतन आयोग के लिए शासन को सौंपे महत्वपूर्ण सुझाव
“एक राष्ट्र-एक वेतन-एक पेंशन” की नीति पर दिया जोर; दुर्गम सेवा और पर्वतीय भत्ते में भारी वृद्धि की मांग

देहरादून,
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तराखण्ड ने आगामी आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की ‘संदर्भित शर्तों’ (Terms of Reference) को अंतिम रूप दिए जाने के संबंध में सचिव, वित्त विभाग, उत्तराखण्ड शासन के माध्यम से भारत सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव प्रेषित किए हैं। परिषद ने स्पष्ट किया है कि यद्यपि वेतन आयोग केंद्र का विषय है, किंतु उत्तराखण्ड जैसे विषम भूगोल वाले राज्य के कार्मिकों का भविष्य इन्हीं सिफारिशों पर टिका होता है।
परिषद ने अपने ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर शासन का ध्यान आकर्षित किया है:
1. वेतन विसंगति और फिटमेंट फैक्टर:
परिषद ने मुद्रास्फीति और बढ़ती लागत को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर को 3.68 करने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही, ग्रेड-पे 1800 को समाप्त कर न्यूनतम ग्रेड-पे 2000 (लेवल-3) निर्धारित करने की मांग की है, ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन मिल सके। इसके अतिरिक्त, ग्रेड-पे 4600 और 4800 के पदों के मर्जर का सुझाव भी दिया गया है।
2. “एक राष्ट्र, एक वेतन, एक पेंशन”:
परिषद ने कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के बीच के अंतर को समाप्त करने की वकालत की है। परिषद का मानना है कि समान शैक्षणिक योग्यता और पददायित्व वाले पदों के लिए देश भर में एक समान वेतन संरचना होनी चाहिए, ताकि राज्यों में बार-बार विसंगति समितियां बनाने की आवश्यकता न पड़े।
3. पर्वतीय सेवा एवं दुर्गम भत्ता:
उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए परिषद ने मांग की है कि पर्वतीय विकास भत्ता (Hill Allowance) एक तय राशि के बजाय ‘बेसिक पे’ का 10-15% निर्धारित किया जाए। साथ ही, अत्यधिक दुर्गम क्षेत्रों में तैनात कार्मिकों के लिए विशेष ‘कठिन सेवा भत्ता’ और बच्चों के लिए हॉस्टल सब्सिडी की भी मांग की गई है।
4. पुरानी पेंशन बहाली और पेंशनर्स का हित:
परिषद ने 01 अप्रैल 2005 से बंद की गई पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) को पुनः स्थापित करने को वेतन आयोग की शर्तों में शामिल करने का पुरजोर समर्थन किया है। साथ ही, 65 वर्ष की आयु से ही पेंशन में 05% की क्रमिक वृद्धि और पेंशन कम्यूटेशन की वसूली अवधि 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष करने का सुझाव दिया है।
5. स्वास्थ्य सुविधा एवं आयकर छूट:
राज्य के कार्मिकों के लिए केंद्र की भांति CGHS की तर्ज पर पूर्णतः कैशलेस और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा की मांग की गई है। साथ ही, महंगाई भत्ते (DA) और चिकित्सा प्रतिपूर्ति को आयकर से मुक्त रखने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि बढ़ती महंगाई में कर्मचारियों को वास्तविक राहत मिल सके।
6. पदोन्नति एवं ACP:
पदोन्नति के सीमित अवसरों को देखते हुए परिषद ने सुनिश्चित करियर प्रोन्नयन (ACP) के लाभों को 7, 14 और 21 वर्ष की सेवा पर देने का सुझाव दिया है।
परिषद ने शासन से अनुरोध किया है कि जब आठवां वेतन आयोग उत्तराखण्ड का भ्रमण करे, तब परिषद के प्रतिनिधियों को अपना पक्ष रखने हेतु समय प्रदान किया जाए और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों में इन सुझावों को प्राथमिकता से शामिल किया जाए।
भवदीय,
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