*सत्र पर बहानेबाजी के बजाय, विपक्ष करे जनमुद्दों पर चर्चा की तैयारी: भट्ट*
*सदन में विपक्ष ने 4 साल हंगामा किया, सुधरे नहीं तो 27 में जीरो आना तय: भट्ट*
देहरादून 28 फरवरी। भाजपा ने सत्र को लेकर कांग्रेसी आरोपों पर आईना दिखाया कि 4 साल विपक्षी हंगामे का गवाह रहा है सदन। ऐसे में आवाज दबाने, सत्रावधि कम होने या बजट प्रस्तुतिकरण की बहानेबाजी अब काम नहीं आने वाली है। बेहतर है सत्र में जनहित के मुद्दे उठाने की तैयारी करे कांग्रेस विधायक। अन्यथा 27 की परीक्षा में फेल के साथ साथ इस बार उनका जीरो नंबर आना निश्चित है।
प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने सत्र को लेकर कांग्रेसी बयानबाजी को तथ्यहीन और बेबुनियादी बताया है। क्योंकि कांग्रेस और विपक्षी विधायकों का सदन में इन 4 सालों का इतिहास देखें तो वह हंगामों और असंवैधानिक कृत्यों से दागदार है। जो आज सदन में विपक्ष की आवाज दबाने की बात करते हैं, उनके विधायकों को विधानसभा में जब जब अवसर मिला, उन्होंने सकारात्मक चर्चा रोकने के लिए हमेशा सदन को बंधक बनाने का प्रयास किया है। जब चर्चा रोकना संभव नहीं हुआ तो वे सदन से बायकॉट कर भाग गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया सदन में कभी भी जिम्मेदार विपक्ष का नहीं रहा है। जनता के मुद्दे और उनकी समस्याएं उठाने के बजाय, उनके विधायकों का ध्यान किसी भी तरह से मीडिया की सुर्खियां बनने में रहता है। पिछले सत्र में तो उनके द्वारा सभी संवैधानिक मर्यादाओं को तार तार कर दिया गया था, जब उनके विधायक सदन में ही कम्बल ओढ़कर सोते पाए गए थे।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, यदि कांग्रेस विधायकों को 5 नहीं 50 दिन भी दे दें तो भी वे जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं कर सकते। क्योंकि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व भाजपा सरकार शानदार कार्य कर, जनता का विश्वास हासिल किया है। शायद ही कोई विषय हो जिसपर हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट न हो, विपक्ष जरूर कन्फ्यूज्ड रहता है। यही वजह है कि हमेशा हंगाम कर, बहस से भगाकर अपनी पोल पट्टी खुलने से बचना चाहता है।
वहीं तंज किया कि गलती कांग्रेस के स्थानीय विधायकों की भी नहीं है, जब उनके आलाकमान गांधी परिवार ही संसद में इसी तरह के कृत्य में जुटा हो। वहां पहले तो उनके नेता राहुल गांधी सदन की बहस में शामिल होने के बजाय विदेश भाग जाते हैं और जब शामिल होते हैं तो असंवैधिक भाषा और अपुष्ट तथ्यों को प्रस्तुत करते हैं। सुधार के लिए टोकने पर सदन को हंगामा मचाकर चलने नहीं देते। ठीक यही परिपाटी कांग्रेस उत्तराखंड में अपनाती आई है और प्रदेश के सवा करोड़ जनमानस की उम्मीदों पर पानी फेरने की कोशिश में लगी रहती है।
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा, कांग्रेस को सत्र की समय सीमा, बजट प्रस्तुतिकरण प्रक्रिया और सरकार के जवाबों की चिंता छोड़ अपने विषयों और सवालों की तैयारी करनी चाहिए। अब भी समय है अन्यथा जब सत्र शुरू होगा तो फिर उन्हें आउट ऑफ सेलेब्स का नाटक कर, हंगामा शुरू करना पड़ेगा। प्रदेश की जनता बहुत समझदार और 27 में फिर से परीक्षक की भूमिका में होगी। कहीं ऐसा न हो कि विगत चुनाव में पहले ही 23 नंबर से फेल हुई कांग्रेस को इस बार जनता, जीरो न कर दे।
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