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Big breaking:-प्राचीन गोमुख तपोवन नंदनवन ट्रेक की मरम्मत कर उसे फिर बहाल करने की तैयारी

पांच साल पहले भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुए प्राचीन गोमुख तपोवन नंदनवन ट्रेक की मरम्मत कर उसे फिर बहाल किया जाएगा। गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने नए ट्रेक रूट के कारण गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में बढ़ रही मानवीय गतिविधियों को कम करने के लिए प्राचीन ट्रेक को बहाल करने की योजना बनाई है। पार्क प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि प्राचीन गोमुख ट्रेक रूट बहाल होता है, तो यह गंगोत्री ग्लेशियर के संरक्षण में मददगार होगा।

वर्ष 2017 में मेरु पर्वत के पास नील ताल टूटने से प्राचीन गोमुख तपोवन नंदनवन ट्रेक क्षतिग्रस्त हो गया था। ताल टूटने से मलबा करीब डेढ़ किमी क्षेत्र में फैल गया था। ट्रेक क्षतिग्रस्त होने के बाद भोजवासा से भागीरथी नदी (गंगा) के ऊपर ट्रॉली लगाकर एक नया ट्रेक रूट तैयार किया गया।

 

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वर्तमान समय में इसी ट्रेक से पर्यटक व तीर्थयात्री भागीरथी नदी को पार करने बाद नदी के किनारे-किनारे तपोवन तक जाते हैं। तपोवन के बाद नंदनवन जाने के लिए गंगोत्री ग्लेशियर के आंतरिक क्षेत्र में प्रवेश करना पड़ता है। फिर पर्यटक नंदनवन और रक्तवन पहुंचते हैं। भागीरथी पर्वत श्रृंखलाओं सहित और कालिंदीखाल ट्रेक के लिए भी इसी ट्रेक का इस्तेमाल करते हैं।नए ट्रेक के कारण ग्लेशियर के आंतरिक क्षेत्र में मानवीय गतिविधियां बढ़ने से ग्लेशियर पर भी ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि पार्क प्रशासन ने अब प्राचीन ट्रेक को दोबारा बहाल करने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है,

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जिसमें पर्यटक ग्लेशियर के आंतरिक क्षेत्र में प्रवेश नहीं नहीं करेंगेवहीं नए ट्रेक की अपेक्षा प्राचीन ट्रेक के छोटा होने से इसके बहाल होने पर पर्यटक व तीर्थयात्रियों को भी लाभ मिलेगा। स्थानीय टूर एंड ट्रेकिंग कंपनी के निदेशक जयेंद्र राणा का कहना है कि पार्क प्रशासन का प्रस्ताव अच्छा है। इससे पर्यटक ग्लेशियर के आंतरिक क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेंगे, जिससे गंगोत्री ग्लेशियर सुरक्षित रहेगावाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन में गंगोत्री ग्लेशियर के 22 मीटर प्रतिवर्ष की दर से पीछे खिसकने की बात सामने आ चुकी है। नए ट्रेक रूट के कारण ग्लेशियर के आंतरिक क्षेत्र में मानवीय गतिविधियां बढ़ने से आने से वाले समय इसके और दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।

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