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Dehradun: नहीं सुलझ रहा विवाद, अब शिक्षकों के वरिष्ठता विवाद मामले में यूपी सरकार को पक्ष बनाएगा उत्तराखंड

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तदर्थ शिक्षकों को यूपी के जिस आदेश के आधार पर विनियमित करने की बात की जा रही है। विभाग को यूपी से वह आदेश नहीं मिल पा रहा है।

 

 

 

शिक्षा विभाग के अपर सचिव मेजर योगेंद्र यादव बताते हैं कि इस मसले पर दो से तीन बार उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर यह पूछा गया कि इस तरह का कोई शासनादेश है या नहीं, लेकिन यूपी से इसका कोई जवाब नहीं आया।प्रदेश में सीधी भर्ती और तदर्थ शिक्षकों के वरिष्ठता विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तराखंड इस मामले में अब उत्तर प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट में पक्ष बनाने की तैयारी में है।

 

 

 

15 हजार से अधिक शिक्षकों की वरिष्ठता से जुड़े इस मामले में विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तदर्थ शिक्षकों को यूपी के समय जिस शासनादेश के आधार पर विनियमित किया गया, उस जीओ के संबंध में कई बार लिखने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिल रहा है। यही वजह है, इस मसले पर अब यूपी को पक्ष बनाया जाएगा।प्रदेश में सीधी भर्ती और तदर्थ शिक्षकों के बीच वरिष्ठता विवाद बना हुआ है।

 

 

 

तदर्थ शिक्षक नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग कर रहे हैं। वहीं सीधी भर्ती के शिक्षकों की ओर से इसका विरोध किया जा रहा है। तदर्थ शिक्षकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अक्तूबर 1990 तक नियुक्त तदर्थ सहायक अध्यापक एलटी व प्रवक्ताओं को विनियमित करने का आदेश किया था। इसके आधार पर 1999 में भुवन चंद्र कांडपाल को वरिष्ठता और पदोन्नति दी गई। इसी आधार पर अन्य शिक्षकों को भी तदर्थ नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता व पदोन्नति का लाभ दिया जाए।

 

 

 

वहीं, इसका विरोध कर रहे सीधी भर्ती के शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 1990 से 1993 तक नितांत अस्थायी व्यवस्था के तौर पर तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, जिन्हें विनियमित होने से पहले वरिष्ठता और पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जा सकता। यूपी के जिस शासनादेश के आधार पर इन्हें विनियिमत करने की बात की जा रही है, दरअसल इस तरह का कोई शासनादेश नहीं है। यदि अन्य तदर्थ शिक्षकों को तदर्थ नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता दे दी गई तो इससे 15 हजार से अधिक शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होगी।

 

 

 

बिना जीओ यूपी से खाली हाथ लौट आए अधिकारी
शिक्षा विभाग इस मामलें में ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद हाईकोर्ट चला गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तदर्थ शिक्षकों को यूपी के जिस आदेश के आधार पर विनियमित करने की बात की जा रही है। विभाग को यूपी से वह आदेश नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा विभाग के अपर सचिव मेजर योगेंद्र यादव बताते हैं कि इस मसले पर दो से तीन बार उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर यह पूछा गया कि इस तरह का कोई शासनादेश है या नहीं, लेकिन यूपी से इसका कोई जवाब नहीं आया।

 

 

 

एक बार विभागीय अधिकारी को भी इस मसले पर यूपी भेजा गया, लेकिन संबंधित अधिकारी भी बिना जीओ यूपी से खाली हाथ लौट आए। अपर सचिव ने कहा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अंतिम बार यूपी के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर बताया जाए कि क्यों न इस मामले में यूपी सरकार को पक्ष बनाया जाए, ताकि इस मसले पर जो भी स्थिति है, वह हाईकोर्ट के सामने स्पष्ट हो सके।

 

 

 

तीन हजार से अधिक शिक्षकों की लटकी है पदोन्नति

शिक्षा विभाग में सीधी भर्ती और तदर्थ शिक्षकों की वरिष्ठता का विवाद न सुलझने से तीन हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति लटकी है। इसमें 2269 सहायक अध्यापक एलटी की प्रवक्ता के पदों पर पदोन्नति होनी है। इसके अलावा कुछ अन्य पदोन्नति लटकी हैं।

 

 

 

पदोन्नति में देरी से नाराज शिक्षक हैं आंदोलनरत

शिक्षा विभाग में पदोन्नति में देरी से नाराज शिक्षक आंदोलनरत हैं। राजकीय शिक्षक संघ शाखा एससीईआरटी के अध्यक्ष अंकित जोशी के मुताबिक जब तक शिक्षकों की पदोन्नति नहीं होगी, शिक्षकों का आंदोलन जारी रहेगा। पदोन्नति में देरी के विरोध में शिक्षक बांह पर काला फीता बांधकर काम करेंगे।18 दिन की तदर्थ नियुक्ति पर कर दिया विनियमित

राजकीय शिक्षक सघंर्ष समिति के प्रांतीय अध्यक्ष ओम प्रकाश कोटनाला बताते हैं, तदर्थ नियुक्ति के बाद तीन साल से पहले शिक्षकों को विनियमित नहीं किया जा सकता, लेकिन 18 दिन की तदर्थ नियुक्ति के बावजूद शिक्षकों को विनियमित कर दिया गया।

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