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Big breaking:-कपड़ों के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। 1 जनवरी से कपड़ों पर महंगाई की मार का संकट फिलहाल टल गया

नयी दिल्ली। कपड़ों के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। 1 जनवरी से कपड़ों पर महंगाई की मार का संकट फिलहाल टल गया है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के विरोध के बाद जीएसटी काउंसिल ने शुक्रवार को कपड़े पर टैक्स की दर 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के फैसले पर रोक लगाने का फैसला किया। फरवरी में होने वाली अगली बैठक में इसकी समीक्षा की जा सकती है।

 

 

 

 

बता दें कि एक जनवरी 2022 से टेक्सटाइल और जूतों पर पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी जीएसटी की योजना थी। राज्य सरकारों से लेकर इन क्षेत्रों स जुड़े उद्योग और कारोबारी इसका विरोध कर रहे थे। काउंसिल की 17 सितंबर को हुई पिछली बैठक में जूतों एवं कपड़ों पर जीएसटी दर संशोधित करने का फैसला लिया गया था।टैक्स लगाने का हुआ था फैसला

 

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में और राज्य के समकक्षों की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 46 वीं बैठक में कपड़े पर टैक्स बढ़ाने के फैसले को टाल दिया गया है। वर्तमान में मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) पर कर की दर 18 प्रतिशत, एमएमएफ यार्न पर 12 प्रतिशत है, जबकि कपड़े पर 5 प्रतिशत कर लगता है। परिषद ने 17 सितंबर को अपनी पिछली बैठक में फुटवियर और कपड़ा क्षेत्रों में उल्टे शुल्क ढांचे को ठीक करने का फैसला किया था।

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जानिए किन राज्यों ने किया विरोध

गुजरात, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने कहा है कि वे 1 जनवरी 2022 से कपड़ा पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के पक्ष में नहीं हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के सलाहकार अमित मित्रा ने पहले केंद्र से कपड़ा पर प्रस्तावित कर की दर में बढ़ोतरी को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा था कि इससे लगभग 1 लाख कपड़ा इकाइयां बंद हो जाएंगी और 15 लाख नौकरियां चली जाएंगी।

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