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Big breaking :-उत्तराखंड का शिक्षा विभाग ऐसे मनाने जा रहा “लोक पर्व फूलदेई “

उत्तराखण्ड लोकसंस्कृति से जुड़े “लोक पर्व फूलदेई ” को मनाये जाने के सम्बन्ध में अब शिक्षा विभाग नहीं आदेश जारी किए हैं जिसके तहत

 

उपर्युक्त विषयक इस कार्यालय में अध्यक्ष /सचिव, शैल नट, गढवाल हिमालय की पंजीकृत नाटय संस्था (रजि0291) पता-अभिषेक बहुगुणा, ऐजेन्सी मोहल्ला, श्रीनगर (गढवाल ) जिला उत्तराखण्ड का पत्र संख्या – एस/02/2022 दिनांक 05.03.2022 एवं श्री अनूप बहुगुणा, सभासद नपाप श्रीनगर एवं संयोजक फूलदेई संक्रान्ति का पत्र दिनांक 07.03.2022 का पत्र इस कार्यालय में प्राप्त हुआ है। प्राप्त पत्र के द्वारा अवगत कराया गया है कि हिन्दू मान्यता के अनुसार चैत्र माह से नववर्ष का प्रारम्भ माना जाता है। बसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति अपने सर्वोत्कृष्ट रूप में होती है। पूरी धरती विभिन्न प्रकार के फूलों से भरी होती है। प्रकृति के इस मनोहारी रूप के समय उत्तराखण्ड में ” फूलदेई पर्व ” मनाया जाता है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा पर्व है कि जो पूर्णतः बच्चो को समर्पित है।

 

 

 

 

इसी कारण उत्तराखण्ड के इस प्रसिद्ध पर्व को “लोक पर्व फूलदेई” को बाल पर्व भी कहते है। उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों की मान्यताओं के अनुसार इसे कहीं 8 दिन, तो कहीं 15 दिन और कुछ क्षेत्रों में पूरे महीने मनाया जाता है। इस दौरान बच्चे घर-घर की देहरियों पर अल सुबह की फूल डालकर बसन्त का स्वागत कर सभी की खुशहाली की कामना करते है। इस वर्ष 14 मार्च को चैत्र संकान्ति के साथ ही इस पर्व का शुभारम्भ किया जाना है।

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शैल नट, गढवाल हिमालय की पंजीकृत नाटय संस्था द्वारा अपने पत्र के माध्यम से यह भी अवगत कराया गया है कि हमारी लोक संस्कृति से जुडी ऐसी कई समृद्ध परम्परायें व पर्व, उपेक्षा के चलते विलुप्ति के कगार पर पहुंच गये है। विगत वर्षों से इस पर्व की परंपरा के संवर्द्धन के लिए सम्बन्धित संस्था प्रयासरत हैं। यह भी अवगत कराया गया है कि इस पर्व पर विद्यालय स्तर पर निबन्ध, पेन्टिंग, भाषण, जैसी प्रतियोगिताएं नई पीढी को अपनी जड़ों से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो सकती है। श्री अनूप बहुगुणा, सभासद नपाप श्रीनगर एवं संयोजक फूलदेई संक्रान्ति द्वारा भी अपने पत्र में उल्लेख किया गया है कि फूलदेई जिसे कि फूल संकान्ति / फूल संग्राद भी कहा जाता है, यहां का प्रमुख पर्व होने के साथ प्रकृति से सीधे संबंधित है, चैत्र माह की संक्राति अर्थात पहले दिन से ही बसंत आगमन की खुशी में फूलों का मनाये जाने वाला यह पर्व ऋतुराज बसंत के आगमन और उसके स्वागत का प्रतीक भी है। विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की इसमें सहभागिता व्यापक रूप से करने हेतु आयोजन समिति द्वारा निम्न गतिविधियों को प्रस्तावित किया गया है :

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सोमवार 14 मार्च 2022 को प्रातः 6 बजे से नगर में प्रभात फेरी और भ्रमण (विद्यालय अपनी सुविधानुसार घोघा माता की डोली तैयार करवा कर बच्चो का सहभाग इसमें सुनिश्चित कर सकते हैं प्रतिभाग करने वाले बच्चों की पारम्परिक परिधान और पोशाकों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किये जाने की अपेक्षा है।)

 

 

 

विद्यालय अपने स्तर से फूलदेई पर्व की थीम पर केन्द्रित ड्राइंग / पेंटिंग और विषय से संबंधित लेख जैसी गतिविधि का आयोजन कर सकते हैं, (विद्यालय से चुनी और भेजी गई किसी एक पेटिंग / लेख को आयोजन समिति किसी निर्धारित तिथि पर प्रदर्शनी में स्थान देगी और छात्र/छात्रा को सम्मानित करेगी), चूंकि फूलदेई त्योहार माह पर्यंत चलने वाला उत्सव है विद्यालय 28 मार्च तक इन गतिविधियों को सम्पादित करते हुये चुनी गई पेंटिंग और लेखो को आयोजन समिति / अजीम प्रेमजी फाउंडेशन श्रीनगर के कार्यालय में जमा कर सकते हैं।

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चैती गायन हेतु विद्यालय से अधिकतम 6 सदस्यीय दल अपनी प्रस्तुती के लिए निर्धारित तिथि पर चैती गायन कार्यक्रम में शामिल हो सकता है, प्रतिभागिता करने वाले दलों को समिति द्वारा सम्मानित किया जायेगा। कार्यालय समापन की सम्भावित तिथि 03 अप्रैल 2022 प्रस्तावित है।

अतः उक्तांनुसार आपको निर्देशित किया जाता है कि विद्यालयों में अध्ययरत छात्र-छात्राओं को “फूलदेई पर्व के प्राचीन इतिहास से अवगत कराते हुये इस पर्व को सफलतापूर्वक एवं पूर्ण हर्षोल्लास से मनाये जाने हेतु अपने स्तर से आवश्यक कार्यवाही करना / करवाना सुनिश्चित करें ताकि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति से जुड़े ” फूलदेई पर्व ” को विलुप्त होने से बचाया जा सके।

 

 

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