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Big breaking:-अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के चुनाव को लेकर जल्दबाजी में नहीं अखाड़ा परिषद , उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह शास्त्री कार्यवाहक अध्यक्ष बने रहेंगे। 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने के बाद नए अध्यक्ष के चयन को लेकर महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने तमाम अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा कि नए अध्यक्ष चयन को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। प्रयाग कुंभ अभी काफी दूर है। सीबीआई नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्थी सुलझाने तक कार्यवाहक अध्यक्ष ही परिषद की जिम्मेदारियां निभाएंगे। श्रीमहंत हरि गिरि 30 सितंबर को हरिद्वार पहुंचेंगे और अखाड़ों के संतों से रायशुमारी भी करेंगे।

 

श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की साजिशन हत्या हुई है। साजिश का खुलासा और हत्यारा पकड़ा जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संत समाज हर तरीके से सीबीआई को जांच में मदद करेगा। संत-महंतों से लेकर जिस पर भी शंका-आशंका है, पूछताछ होनी चाहिए। बाघंबरी पीठ पर उत्तराधिकारी की गद्दी चादरपोशी होने तक अखाड़ों के संत प्रयागराज में ही हैं

 

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श्रीमहंत हरि गिरि ने नए अध्यक्ष चयन को लेकर अटकलों को अफवाह बताया। कहा कि प्रयाग कुंभ 2024 में है, इसलिए परिषद अध्यक्ष के चयन को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी ठीक नहीं है। सीबीआई किसी नतीजे पर पहुंचे, इसके बाद ही नए अध्यक्ष चयन को लेकर कवायद शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह 30 सितंबर को हरिद्वार पहुंचेंगे। हरिद्वार में प्रत्येक अखाड़े में स्वयं जाएंगे और रायशुमारी भी करेंगे। बिना अखाड़ों के संतों को विश्वास में लिए परिषद कोई भी फैसला नहीं लेगी। श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि अधिकतर अखाड़ों के संत श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की मौत का सच जानना चाहते हैं। भविष्य में नए अध्यक्ष के चयन प्रक्रिया होने तक उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह शास्त्री कार्यवाहक अध्यक्ष बने रहेंगे।

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परिषद पदाधिकारियों का पांच साल का कार्यकाल

परिषद की कार्यकारिणी हरिद्वार कुंभ के दौरान 2021 में बनी है। अखाड़ों की आमराय से ही अध्यक्ष से लेकर दूसरे पदाधिकारियों का चयन हुआ है। कार्यकारिणी पांच साल की होती है। इसमें प्रत्येक अखाड़े के दो-दो प्रतिनिधि अखाड़े के अध्यक्ष, महामंत्री और उपाध्यक्ष से लेकर महत्वपूर्ण पदाधिकारियों का चयन करते हैं। 13 अखाड़े हैं, लेकिन तीन बैरागी अखाड़ों ने कुंभ के दौरान नाराज होकर खुद को अखाड़ा परिषद से अलग होने की घोषणा कर दी थी।

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