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Big breaking:-शिक्षा विभाग को बड़ी जल्दी याद आई शिक्षकों के लिए ये योजना , कभी पूरी होगी भी या केवल कागजों में बनेगी

प्रदेश में सरकारी विद्यालयों के नजदीक ही शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। शिक्षा विभाग शिक्षकों की आवासीय परेशानी को दूर करने के लिए कार्ययोजना तैयार करेगा। इसे नए शैक्षिक सत्र से क्रियान्वित करने के संकेत हैं।

 

 

 

 

प्रदेश में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक सरकारी विद्यालयों की संख्या करीब 17 हजार है। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यालय दूरस्थ पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इन क्षेत्रों में विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या आवासीय है। इस वजह से दूरदराज में तैनाती को लेकर शिक्षकों में हिचक बनी रहती है। इसी वजह विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति का मसला हमेशा राजनीतिक मुद्दा बना रहता है। पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में छात्रसंख्या लगातार घटने के बाद सरप्लस शिक्षकों की समस्या भी खड़ी हो चुकी है।

 

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सरप्लस शिक्षकों को अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में समायोजित किया जाना है। साथ ही एक ही परिसर में चल रहे कई विद्यालयों का विलीनीकरण भी किया जाना है। आवासीय परेशानी के चलते इन कार्यों में भी अड़ंगा लग रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस समस्या को देखते हुए शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। ऐसा होने पर विद्यालयों के एकीकरण की समस्या का भी निदान संभव होगा।भूमि और वित्तीय संकट का भी पेच

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मुख्यमंत्री के निर्देश को देखते हुए विभाग की ओर से आवासीय व्यवस्था को लेकर मंथन किया जा रहा है। हालांकि, यह भी तय है कि विद्यालयों के समीप आवासीय भवन बनाने में भी भूमि की उपलब्धता और वित्तीय संकट का पेच है। इसे देखते हुए विभाग बीच का रास्ता तलाश करने में जुटा है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने विभाग को कार्ययोजना जल्द तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

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