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Big breaking:-दून के ऐतिहासिक मैदानों में से एक रेंजर्स मैदान को संडे बाजार की ‘गंद’ के हवाले कर दिया , सब जानते हैं ये कहा से आते हैं ,इन्हें संरक्षण किस लालच में

देहरादून। दून के ऐतिहासिक मैदानों में से एक रेंजर्स मैदान को संडे बाजार की ‘गंद’ के हवाले कर दिया गया है। ऐतिहासिक मैदान को ‘बेचने’ वाले कोई और नहीं बल्कि उत्त्तराखण्ड के ही कर्णधार है।

 

अभी कुछ समय पहले ही रेंजर मैदान जिला प्रशासन को मिल गया है ऐसे में इससे खेल के हब के रूप में स्थापित करने की जगह यहां इस तरीके के व्यापारी खेल खेले जा रहे हैं जबकि सभी जानते हैं कि देहरादून में अब कोई ढंग का खेल का मैदान बचा ही नहीं है परेड मैदान को स्मार्ट सिटी के नाम पर स्वाहा किया गया तो आधे परेड ग्राउंड को खेल विभाग को सौंप दिया गया जिसमें खेल विभाग से संबंधित बच्चे खेल सकते हैं वही पवेलियन के हालात भी सभी जानते हैं ऐसे में देहरादून के दिल में बच्चों के लिए एक खेल मैदान की जरूरत थी जो और रेंजर मैदान पूरा करती है लेकिन वहां भी संडे बाजार लगाने का खेल खेला जा रहा है

इस संडे बाजार में स्थानीय युवाओं को कोई रोजगार नहीं मिलता जबकि बाहरी खुद को असहाय बताकर रोजगार कर रहे हैं लेकिन चिंताजनक ये की इस खेल को खिलवाने वाले हर हफ्ते लाखों रुपये अंदर कर दे रहे हैं। सूत्रों की मानें तो संडे बाजार से हर महीने कुछ लोग आराम से लाखों का गेम खेल रहे हैं।

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आपको बता दें कोविड के चलते लंबे समय तक संडे बाजार बंद रहा। हाइकोर्ट ने भी इसे शिफ्टिंग के निर्देश दिए थे जिसके बाद निगम इस बाजार को लगातार कभी कहीं तो कभी कहीं भेज रहा था। रायपुर बस स्टैंड पर भी ये बाजार लगने लगा था लेकिन वहां इस बाजार के जाने से कुछ कुछ लोगों को हर माह लाखों का नुकसान होने लगा।

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इस बीच बेहद शातिराना ढंग से इस बाजार को दून के ऐतिहासिक मैदानों में से एक रेंजर्स में शिफ्ट कर दिया गया है। इस बाजार में स्थानीय युवाओं को कोई रोजगार नहीं मिलता जबकि जिस तरह से दून की नदियों के किनारे बाहरियों को लाकर नदियों का इतिहास भूगोल बिगाड़ा गया अब उसी तर्ज पर बाहरियों के जरिये रेंजर्स मैदान को भी बर्बाद करने पर तुले हैं।

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आपको बता दें कि नगर निगम ने इस बाजार में एक निर्धारित संख्या में फड़ लगाए जाने की अनुमति दी है लेकिन यहां करीब 5 गुना अधिक फड़ लगती है। निगम इनसे नाम मात्र का शुल्क लेता है जबकि सूत्र बताते हैं कि अतिरिक्त लगने वाली एक एक फड़ से हजार से लेकर दो हजार तक वसूले जाते हैं। इस तरह लाखों की चांदी हर माह कटती है। यही वजह है कि इस बाजार को रेंजर्स मैदान में लाने के लिए बड़ा खेल किया गया।

 

 

 

 

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