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Big breaking:-दून मेडिकल कालेज में एक और आंदोलन , अब MBBS छात्र – छात्राओं ने किया बढ़ी फीस के खिलाफ धरना प्रदर्शन , फीस कमी तक जारी रहेगा आंदोलन

उत्तराखंड के गरीब छात्रों के लिए नीट क्वालिफाई करने के बावजूद डाक्टर बनने का सपना काफी महंगा साबित हो रहा है। यहां राजकीय मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की फीस देश के नामी सरकारी मेडिकल कालेजों के मुकाबले चार गुना से भी अधिक है। फीस अत्याधिक होने के कारण छात्र व अभिभावक परेशान हैं। उनके लिए सवा चार लाख रुपये सालाना शुल्क जमा करा पाना मुश्किल हो रहा है।

वह फीस में रियायत चाहते हैं। दून मेडिकल कालेज के 2019 व 2020 बैच के छात्र-छात्राओं ने अपनी इस मांग को लेकर शनिवार को धरना-प्रदर्शन किया। वह अब तक ट्विटर-फेसबुक पर अपनी पीड़ा बयां कर रहे थे। छात्र-छात्राओं का कहना है कि उनका आंदोलन फीस कम होने तक अनवरत रूप से चलता रहेगा।


दरअसल, उत्तराखंड में तीन सरकारी मेडिकल कालेज हैं। वर्ष 2018 तक तीनों कालेजों में बांड व्यवस्था थी, जिसके तहत छात्र रियायती दर पर पढ़ाई कर सकते थे। पर दो साल पहले दून और हल्द्वानी मेडिकल कालेज से बांड खत्म कर दिया गया। छात्रों का कहना है कि बांड व्यवस्था के तहत फीस 50 हजार रुपये सालाना थी।

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बांड व्यवस्था खत्म होने से अब उन्हें तकरीबन 4.25 लाख रुपये सालाना देने पड़ रहे हैं। ऐसे में राज्य के मेधावी और सामान्य घरों के बच्चों के लिए डाक्टरी की पढ़ाई मुश्किल हो गई है। छात्रों का कहना है कि अन्य राज्यों के सरकारी मेडिकल कालेजों में अधिकतम फीस 1.25 लाख तक है। ऐसे में राज्य सरकार यहां भी जल्द फीस कम करे। अगर बांड की व्यवस्था फिर से शुरू हो जाए तो भी उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, आयुष मंत्री डा. हरक सिंह रावत, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी व स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी के समक्ष वह अपनी बात रख चुके हैं।

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आश्वासन सभी ने दिया, पर कार्वाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। उस पर कालेज ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया है। यह ताकीद की सालाना फीस जमा न करने पर उन्हें कक्षाओं व परीक्षाओं में नहीं बैठने दिया जाएगा।

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