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Big breaking:-किस्सा कुर्सी का – मसूरी में गणेश के सामने कांग्रेस के पास नहीं मजबूत “तारणहार

 

दून की मसूरी विधानसभा सीट जिले में कांग्रेस की कमजोर कड़ी साबित हो रही है। इस सीट पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी जैसे कद्दावर नेता के सामने कांग्रेस यहां दूर दूर तक मुकाबले में नहीं दिखती।

 

 

 

इस सीट पर यूं तो कांग्रेस की गोदावरी थापली एवं उनके पति बिल्लू थापली एक बार फिर कांग्रेस से टिकट का दावा कर रहे हैं लेकिन जिस तरह से लगातार बीते 10 सालों में वे दो बार मुँह की खा चुके हैं और उसके बावजूद आज तक सीमित क्षेत्र तक बंधे रहने के कारण उनके टिकट पर दावे को कमजोर कर रहा है।

 

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दूसरी ओर इस बार पूर्व विधायक व वयोवृद्ध नेता जोत सिंह गुनसोला मजबूती से टिकट की मांग कर रहे हैं। हालांकि गुनसोला की राजनीति केवल मसूरी तक सीमित होने के कारण इस बार भी उनके दावे के बावजूद उनकी टिकट की राह आसान नहीं।

 

 

 

वहीं, भाजपा बाहुल्य सीट पर नगर निगम के वार्ड 1 मालसी से कांग्रेस के टिकट पर पहली बार पार्षद बने युवा बोहरा भी टिकट की मांग कर रहे हैं लेकिन बेहद युवा होना और अनुभव की कमी उनके दावे को कमजोर कर रही है। इसके अलावा छात्र नेता पंकज छेत्री भी कांग्रेस से अपना टिकट का दावा पेश करते हुए नजर आ रहे हैं जगह-जगह उनके पोस्टर भी दिखाई दे रहे हैं लेकिन

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ऐसे मे कांग्रेस के ये तीनों ही दावेदार बहुत मजबूत नहीं दिखते। अगर कांग्रेस आने वाले दिनों में किसी हैवी वेट प्रत्याशी को parachute प्रत्याशी के तौर पर उतारती है तो संभव है कि कांग्रेस के लिए इस सीट पर कोई गेम बन जाये।

 

वहीं बीजेपी की बात करें तो गणेश जोशी के अलावा इस चीज पर ना कोई दावेदार नजर आ रहा है और ना ही कोई दावा कर रहा है गणेश जोशी की कार्यशैली उन्हें इस बार भी फ्रंट रनर दिखा रही है साफ है जब तक कांग्रेस इस सीट पर किसी मजबूत नेता को टिकट नहीं देती है तब तक इस सीट पर किसी भी तरीके का खेला होना संभव नजर नहीं आ रहा है

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ये है सीट कि स्थिति

परिसीमन से पहले मसूरी सीट का मतलब अधिकांश पहाड़ी इलाके ही था लेकिन परिसीमन बाद इसका पूरा भूगोल बदल गया। वर्तमान में मसूरी इसका हिस्सा भर है तो पुरकल से लेकर राजेन्द्र नगर, राजपुर से लेकर जाखन, आर्यनगर, गढ़ी घनगोड़ा इसके हिस्से हैं।

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