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Big breaking :-बेरोजगार रोजगार के लिए भटक रहे और सहकारिता भर्ती में सेटिंग से नौकरी , कांग्रेस भी मुद्दे पर बयानबाजी तक सीमित, सड़क पर उतरने से परहेज

जीरो टॉलरेंस सरकार में भर्ती घोटाला हो गया ईमानदार छवि  के धन  सिंह  के विभाग  में जमकर  भ्रस्टाचार हो गया अब मामला खुल  गया तो कार्यवाही की लीपा पोती चल  रही  हैं लेकिन सवाल  ये हैं कि क्या अधिकारियो  ने ही अपने परिवार  के लोगो को नौकरी  दी या फिर नेताओं ने भी  सेटिंग की वही  विपक्ष  भी  इस मुद्दे पर  रस्म अदायगी  करता  दिखाई  दें रहा हैं अभी  तक इस भ्रस्टाचार  के मामले पर  कांग्रेस नेताओं ने कोई भी  बड़ा आंदोलन  नहीं किया हैं हाँ मिडिया में बयानबाजी  जारी हैं

 

 

साफ  हैं बेरोजगार रोजगार के लिए  भटक  रहे  हैं और भर्ती में नेता अधिकारी  अपने परिवार  के लोगो को नौकारी बाँट रहे  हैं जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी के 423 पदों पर तीन जिलों के रिजल्ट जारी होने के बाद जिस तरह से चयनित अभ्यर्थियों के नाम सामने आ रहे हैं, वह चौंकाने वाले हैं। चुने गए अभ्यर्थियों में भाई-भतीजावाद के तमाम उदाहरण सामने आ रहे हैं।

प्रदेश में सहकारिता विभाग की ओर से जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी के 423 पदों के लिए की गई भर्ती परीक्षा के तीन जिलों की ओर से परिणाम जारी किए जा चुके हैं। चुने गए अभ्यर्थियों में भाई-भतीजावाद के तमाम उदाहरण सामने आ रहे हैं। नौकरी अगर सरकारी हो, तो कुछ भी चलेगा की तर्ज पर चेयरमैन, निदेशक और प्रबंधक जैसे पदों पर बैठे लोगों के बच्चों को उसी विभाग में चपरासी बनने में भी गुरेज नहीं है।

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अभी तो मात्र तीन जिलों का रिजल्ट जारी किया गया है, तब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अन्य जिलों की आगे की प्रक्रिया पर रोक के बाद जांच शुरू हो गई है। सहकारिता विभाग की ओर से जिला सहकारी बैंकों में भर्ती में अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के निर्देश पर शासन ने मामले की जांच शुरू करा दी है।

तीन जिलों के रिजल्ट जारी होने के बाद जिस तरह से चयनित अभ्यर्थियों के नाम सामने आ रहे हैं, वह चौंकाने वाले हैं। इससे भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अफसरों के अलावा नेताओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। सहकारिता विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो सहकारी संघ के एक चेयरमैन का भतीजा, उत्तरकाशी जिले के दूसरे अधिकारी का बेटा, पिथौरागढ़ के एक चेयरमैन के छोटे भाई की पत्नी, देहरादून में तैनात एक संविदा कर्मचारी की पत्नी, जिला सहकारी कार्यालय में तैनात एक अधिकारी का बेटे सहित तमाम उदाहरण सामने आ रहे हैं, जिनका इस भर्ती प्रक्रिया में चयन हुआ है।

 

काम नहीं हुआ तो शिकायत कर दी
इतना ही नहीं भाई-भतीजावाद के इस खेल में तमाम नेताओं और अफसरों का नाम भी सामने आ रहा है, जिनकी सिफारिश पर तमाम अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया। इसमें कुछ नेता सीधे तौर पर सहकारिता से जुड़े हैं तो कइयों ने दूसरे नेताओं और अफसरों से सिफारिश लगवाई। इधर, इस मामले में सहकारिता से जुड़े अफसर अब कुछ भी कहने से बच रहे हैं। सहकारिता से जुड़े एक बड़े अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ नेताओं के रिश्तेदारों का चयन नहीं हुआ तो उन्होंने दूसरे नेताओं को साथ लेकर मुख्यमंत्री से मिलकर इस मामले में शिकायत कर दी। जबकि वह खुद अपने रिश्तेदारों को चयनित कराए जाने को लेकर सिफारिश लगवा रहे थे।

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इस मामले में उप निबंधक अल्मोड़ा, नीरज बेलवाल की अध्यक्षता में जांच कर रही कमेटी ने दूसरे दिन जिला सहकारी बैंक देहरादून की पत्रावलियां खंगालीं। पहले दिन जांच टीम को प्रबंधन की ओर से सहयोग नहीं किए जाने की बात सामने आई थी। इस पर जांच टीम ने देर शाम प्रशासनिक भवन को सील कर दिया था। इस मामले में जांच में सहयोग नहीं करने पर महाप्रबंधक वंदना श्रीवास्तव की ओर से अनुभाग अधिकारी अमित शर्मा को निलंबित किया जा चुका है।

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सहकारिता विभाग की भर्ती में जांच के दायरे में आए जिलों में जिला सहकारी बैंकों के जिला सहायक निदेशक (एआर) और महाप्रबंधक (जीएम) बदले जाएंगे। सचिव सहकारिता मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि निष्पक्ष जांच के लिए शासन के स्तर पर यह फैसला लिया गया है। कहा कि इस मामले में शिकायत मिलने के तुरंत बाद एक समिति का गठन कर जांच शुरू करा दी गई है। जांच समिति को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राज्य निर्माण के बाद यह दूसरा मौका है, जब सहकारिता विभाग में सीधी भर्ती प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे पहले वर्ष 2016-17 में भर्तियां हुईं थीं। तब भी हरिद्वार और अल्मोड़ा जिले में हुई भर्तियों के मामले में विवाद हुआ था, जो अब भी कोर्ट में विचाराधीन है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब बीते कई वर्षों से विभाग में भर्तियां ही नहीं हुईं, तो कामकाज कैैसे चल रहा था? विभाग के पुष्ट सूत्रों की मानें तो पिछले तीन सालों में बैकडोर से 250 से 300 संविदाकर्मियों को नियमित कर दिया गया। अगर इस मामले की भी जांच की जाए तो तमाम नए राज सामने आ सकते हैं।

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