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Big breaking :-उत्तराखंड मे बिन बारिश के बीत रहे महीने ,मार्च के बाद अप्रैल में भी पारा रिकार्ड स्तर पर बना रहा

Uttarakhand Weather : उत्तराखंड में मौसम की बेरुखी जारी है। बारिश न होने से प्रदेशभर में भीषण गर्मी बेहाल कर रही है। मार्च के बाद अप्रैल में भी पारा रिकार्ड स्तर पर बना रहा।

यह सीजन अब तक पिछले 30 साल में सबसे गर्म है।

जबकि, अप्रैल में बारिश की बात करें तो नौ साल में इस बार सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। जबकि, मार्च में बारिश की कमी ने 38 साल का रिकार्ड तोड़ा था। इसके अलावा अधिकतम तापमान ने भी अप्रैल में 12 साल और मार्च में 13 साल में सर्वाधिक का रिकार्ड बनाया।

 

 

उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में

समूचा उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में है। मैदानी इलाकों में पारे में अत्यधिक उछाल के साथ ही लू के थपेड़े बेहाल कर रहे हैं। उत्तराखंड में भी स्थिति इतर नहीं है। यहां पारे के कुलांचे भरने के साथ भीषण गर्मी पड़ रही है। मौसम की बेरुखी भी नए-नए रिकार्ड स्थापित कर रही है।

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अप्रैल में प्रदेश के सभी जिलों में सामान्य से 78 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसमें भी पौड़ी, हरिद्वार और नैनीताल जिले ऐसे रहे, जहां एक बूंद बारिश नहीं हुई। इसके अलावा अल्मोड़ा, चंपावत, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में भी बारिश न के बराबर हुई।

 

 

 

अप्रैल में सामान्यत: प्रदेश में 35 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। जबकि, इस बार यह 7.7 मिमी रही। जो कि पिछले नौ वर्षों में सबसे कम है। इससे पहले वर्ष 2013 के अप्रैल में सबसे कम 7.8 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई थी। मौसम विशेषज्ञ इसे पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती प्रवाह के कमजोर पडऩे को मान रहे हैं।

 

 

 

अप्रैल में तापमान ने बनाया रिकार्ड

अप्रैल में शुष्क मौसम के बीच तापमान रिकार्ड स्तर पर पहुंचा। देहरादून में बीते 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। इससे पहले वर्ष 2016 में अप्रैल में पारा 39 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इसके अलावा बीते 13 वर्ष में हमेशा ही 39 से नीचे रहा है। वहीं रुड़की, हरिद्वार, कोटद्वार, रुद्रपुर और काशीपुर में तापमान 13 साल बाद 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा।

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मार्च में 38 साल का टूटा रिकार्ड

मार्च महीना सूखा बीता। इस दौरान प्रदेश के छह जिलों में बारिश नहीं हुई। जबकि, सात जिलों में भी नाम मात्र की बारिश हुई। दून में 38 साल बाद यह पहला मौका है जब मार्च बिना बारिश के गुजर गया। ऐसे में ज्यादातर जिलों में पारा भी सामान्य से कई डिग्री सेल्सियस तक अधिक बना रहा। जिससे मार्च मध्य से ही भीषण गर्मी का एहसास हो रहा है। 12 साल बाद उत्तराखंड के ज्यादातर इलाकों में पारा औसत से चार से सात डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा।

औसत तापमान में 30 साल में सर्वाधिक उछाल

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मार्च और अप्रैल में उत्तराखंड में सामान्य से करीब 90 प्रतिशत कम बारिश हुई। आमतौर पर एक मार्च से 30 अप्रैल तक प्रदेश में 90 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। जबकि, इस बार यह महज 10 मिलीमीटर रही। ऐसे में औसत तापमान में भी सामान्य से लगातार अधिक बना रहा। इन दोनों महीनों में अधिकतम तापमान में औसत वृद्धि चार डिग्री सेल्सियस रही। इससे पहले 1992 में ही ऐसी स्थिति बनी थी।

इस सीजन में अब तक बारिश की स्थिति(मिमी में)

जनपद- वास्तविक- सामान्य- अंतर

हरिद्वार- 00- 43.1- -100

पौड़ी- 00- 62.2- -100

नैनीताल- 0.3- 68.4- -99

ऊधमसिंह नगर- 0.3- 22.5- -99

अल्मोड़ा- 1.8- 75.1- -98

देहरादून- 2.5- 77.0- -97

टिहरी- 3.8- 83.7- -95

चंपावत- 4.5- 55.3- -92

रुद्रप्रयाग- 12.1- 139.6- -91

उत्तरकाशी-15.6- 110.9- -86

पिथौरागढ़- 20.9- 126.7- -84

चमोली- 20.9- 117.2- -82

बागेश्वर- 19.1- 75.1- -75

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