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Big breaking:-फिर बातों बातों में खुद को सीएम फेस बनाने की वकालत कर गए हरीश रावत ,खुलकर बैटिंग करना चाहते हैं हरदा , अभी बंधन में कर रहे खुद को महसूस कहा मेरा स्वाभाविक खेल खेलने दो हालात बदल दूंगा

हरीश रावत पार्टी के वरिष्ठ नेता है साथ ही चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भी है ऐसे में हरीश रावत ने फेसबुक पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखकर खुद को खुलकर खेलने देने की वकालत करते दिखाई दे रहे है

हरीश रावत कहते है कि  6 सितंबर, 2021 को 8:30 बजे रात्रि में #रुद्रपुर के अंबेडकर पार्क में अभूतपूर्व #परिवर्तन_यात्रा की प्रथम चरण की समाप्ति के बाद दिल्ली को लौटा हूँ। आज सुबह 10:30 बजे दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेना है। मैंने इस यात्रा को अभूतपूर्व इसलिए कहा कि अपेक्षा से कई गुना ज्यादा समर्थन और कांग्रेसजनों की एकजुटतापूर्ण उत्साह देखने को मिला। जनता ने जितनी उत्सुकता और खुला समर्थन यात्रा के प्रति दिखाया और वो सामान्यतः राजनैतिक यात्राओं में दिखाई नहीं देता है। हमने चुनाव में भी, चुनाव के बाद भी अलग-अलग मुद्दों पर बहुत सारी ऐसी यात्राएं की हैं। जब 2001 में मैं, इस तरीके की यात्राओं का आयोजन करता था तो उस समय जो उत्सुकता लोगों में रहती थी और जो समर्थन मिलता था,

आज वही समर्थन लोगों में दिखाई दे रहा है। हां एक अंतर जरूर है, उस समय कांग्रेसजनों को बहुत बड़ी अपेक्षा नहीं थी, काम कर रहे थे, भागीदारी उस समय भी पूर्ण थी। मगर उन्हें ऐसा विश्वास नहीं था कि हम 2002 में पूर्ण बहुमत पाकर के सरकार बनाने जा रहे हैं। आज कार्यकर्ताओं को यह लगता है कि वो सरकार बना सकते हैं। इसलिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है, नये-पुराने लोग आगे आये हैं। यदि इन सब लोगों को श्री देवेंद्र यादव और  गणेश गोदियाल जी संभालकर के रख सकें तो कांग्रेस के लिए भविष्य की बहुत बड़ी एक जमात हर विधानसभा क्षेत्र में खड़ी हो जाएगी। अंतर्विरोध होंगे, अंतर्विरोध परेशान भी करेंगे, मगर पार्टी सफल दिखाई देगी। 2008-9 के बाद पार्टी में नये लोगों का प्रवेश नहीं हो रहा था,

इसलिये पार्टी हर स्थान पर थोड़ी कमजोर नजर आ रही थी। 2014 में मुझे असाधारण परिस्थितियों में काम करने का मौका मिला। मगर अंत तक अपनी कमजोरी मानता हूंँ कि मैं पार्टी का पूरा समर्थन अपने साथ जोड़कर नहीं रख सका और जो नये लोग आए वो नये लोग पार्टी के प्रति निष्ठावान बनकर के नहीं रह सके, उनमें से बहुत सारे लोग सुविधाजीवी प्रवृत्ति के रहे और वो संघर्षकाल में धीरे-धीरे विलुप्त होते गये। इधर भी पार्टी कमजोर नजर आती थी, मैंने सल्ट के उपचुनाव की हार का जब विश्लेषण किया तो उस विश्लेषण में धन शक्ति, प्रबंधन क्षमता भाजपा की ये तो सब बातें थी, भितरघात भी था, लेकिन एक फैक्ट्रर यह भी था कि हमारे कार्यकर्ताओं में जोश था। मगर संगठनात्मक दुर्बलता पार्टी के ऊपर हावी थी।

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जिस कारण हम जन भावना पैदा करने के बाद भी उसको वोटों में ट्रांसलेट नहीं कर पाए थे और ऐसा नहीं है कि प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में परिवर्तन आने के बाद हमने उस कमजोरी पर पार पा लिया है! उस दिशा में कोई सार्थक काम अभी नहीं हुआ है बल्कि हम पहले से ज्यादा अंतर्विरोधों से घिरे हुए हैं। इस यात्रा में अंतर्विरोध दृष्टिब्य थे, मगर जनभावना व जनता और सामान्य कार्यकर्ता के उत्साह को देखकर वो अंतर्विरोध दब जा रहे थे, कोई पूर्ण मनोयोग से तो कोई किसी प्रकार हर गव्यक्ति अपने को यात्रा के साथ जोड़े हुये था, क्योंकि जनता जुड़ रही थी, जनभावना साफ दिखाई दे रही थी तो कोई भी राजनैतिक आकलनकर्ता ऐसी आदर्श स्थिति में अपने को रुठा हुआ नहीं दिखाना चाहेगा, वो भी चढ़ती हुई बारात में सम्मिलित होना चाहता है। अब इस चढ़ती हुई बारात से जो ताकत आई है, उसको कैसे हम एक संगठनात्मक स्वरूप दे सकते हैं, यह मेरी चिंता का विषय है।

हम दूसरे चरण की यात्रा 3 दिन हरिद्वार में करेंगे मैं जानता हूंँ हरिद्वार में यह यात्रा अभूतपूर्व होगी। उधमसिंहनगर और नैनीताल में मिले जनसमर्थन से ज्यादा प्रभावशाली होगी, क्योंकि हरिद्वार का स्वभाव भी है और उनका लगाव भी है। पहाड़ों में भी स्वाभाविक रूप से भाजपा के प्रति एक वितराग पैदा हो गया है, क्योंकि उन्होंने पहाड़ों को बड़ा निराश किया है। निराश तो सब हैं, पूरे उत्तराखंडवासी हैं। मगर पहाड़ों में वो निराशा ज्यादा दिखाई देती है, क्योंकि पहाड़ों में जीवन की स्थिति कठिनतर है, पहाड़ों में भी हमको परिवर्तन यात्रा के समर्थन के प्रति किसी प्रकार की दुविधा नहीं है, बहुत उत्साहवर्धक रहेगी। अब हमें करना क्या है, यह एक प्रमुख बिंदु है।

प्रदेश कांग्रेस में नये अध्यक्ष आये हैं और आते ही उन पर जिम्मेदारियों का पहाड़ चढ़ने का संयोग बना हुआ है और वो इस सहयोग में सफल होते हैं तो अगले 20-25 सालों के लिए उत्तराखंड कांग्रेस को एक और स्थापित नेता मिल जाएगा। संभावनाएं प्रबल हैं, व्यक्तित्व में आवश्यक गुण भी विद्यमान हैं, मेहनत करने की क्षमता भी है, मगर समय की कमी को देखते हुये समन्वय आवश्यक है। पार्टी का पूरा ढांचा अध्यक्ष के साथ चलेगा, यह एक यक्ष प्रश्न है और इस यक्ष प्रश्न का उत्तर खोजे बिना परिवर्तन यात्रा की सफलता को राजनैतिक सफलता में बदलना बहुत असंभव नहीं तो दुरूह कार्य जरूर है और मैं भी एक अजीब सी मनोस्थिति में हूंँ। अभियान समिति का अध्यक्ष हूंँ, चुनाव की सारी प्रक्रिया की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है। लेकिन मैं यह नहीं समझ पा रहा हूंँ कि, मैं समझते हुये भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने की स्थिति में हूँ नहीं। यदि मैं प्रयास करूंगा तो कई तरीके के विरोधाभास उभरकर के सामने आ जाएंगे।

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मैं स्वभावतः एक संवेदनशील व्यक्ति हूँ, परिस्थितियां मुझसे चुनौती को स्वीकार करवाती हैं और मैं चुनौतियों के आगे डठकर के खड़ा हो जाता हूंँ। चुनौती हमारे सामने यह है कि जो संगठनात्मक कमजोरी है जो बिल्कुल स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रही है, हममें और प्रमुख विपक्षी दलों में, साधनों की जो कमी है वह भी स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रही है और यह भी मुझे मानने में कोई गुरेज नहीं है कि हमसे हमारे प्रतिद्वंदी बेहतर प्रबंधकीय क्षमता वाले हैं। मेरे सामने लाभ की स्थिति केवल इतनी है कि मैं पिछले बार का ठुकराया हुआ व्यक्ति हूंँ जो भूतपूर्व मुख्यमंत्री है।

2016 में एक अजीब तरीके की अप्रत्याशित लड़ाई मुझे लड़नी पड़ी। एक तरफ 2014-15 में पुनर्निर्माण और पुनर्वास का दुर्घस कार्य मेरे और मेरी सरकार के सम्मुख था, तो 2016 में सरकार के बचाने का और सरकार को चलाने का अत्यधिक विषम कार्य हमारे सामने था। आज जब मैं कभी एकांत में विचार करता हूंँ तो मुझे अपने आप पर आश्चर्य होता है कि क्या हम ऐसा संभव बना पाए! अप्रत्याशित रूप से हमको कई क्षेत्रों में सफलता मिली, लेकिन चुनाव में हमको सफलता नहीं मिल पाई। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार हमारी जन कल्याणकारी योजनाओं से जनता का ध्यान हटाने में सफल हो गई। उन्होंने पहले अस्थिरता आदि-आदि को विमर्श में शामिल करवाया और फिर कई भाई बंधुओं को लाकर के विमर्श को और जटिलतम बना दिया। लोग यह नहीं समझ पाये कि वस्तुतः उनका हित कहां है! लेकिन 2 प्लस प्वाइंट हमारे पास रह गये चुनावी हार के बावजूद कि एक तो मैं बुरी तरीके से हारा और मेरी हार ही मेरे लिए एक सकारात्मक स्थिति है। क्योंकि लोग उत्तराखंड में, बड़ी संख्या में यह मानने वाले हैं कि मैं इस हार के लायक नहीं था। हमारे लोग बड़े दयालु हैं जब वो एक बार आपके विषय में सकारात्मक रूप में सोचने लग जाते हैं तो फिर उनमें दया भाव उमड़ पड़ता है, तो आज मेरे प्रति भी लोगों में एक दया भाव है।

दूसरा हमने जो सैकड़ों इनीशिएटिव लिये, अलग-अलग क्षेत्रों में जन कल्याण के, विकास के, कई काम शुरू किये। उन कामों के लाभार्थियों की संख्या आज स्पष्टतः वर्तमान सरकार से असंतुष्ट है। क्योंकि वर्तमान सरकार ने उनमें से अधिकांश योजनाओं को या तो बंद कर दिया, उनको कमजोर कर दिया या उनके स्वरूप को बदल दिया तो एक बड़ा वर्ग जो वर्तमान सरकार की इस कारगुजारी से खिन्न है, वो हमारा समर्थन बनकर के खड़ा है। तीसरी बात जो हमारे पक्ष में जाती है, वह है भाजपा के वर्तमान नेतृत्व वर्ग में किसी के पास राज्य के विकास की सोच का एक खाका नहीं है, वो किसी के सामने उसको रख नहीं पाये हैं और मेरी क्या सोच है वो लोगों को धरातल पर भी दिखाई दी है किसी न किसी रूप में, किसी को कम दिखाई दी है, किसी को ज्यादा दिखाई दी है, किसी को कम सहमति रही है, किसी को ज्यादा सहमति रही है, ये सब बातें हो सकती हैं। मगर लोगों को दिखाई दी हैं, लोग यह कहते हुए मिलते हैं कि हरीश रावत के पास एक सोच थी भई, उस पर वो काम कर रहा था। लेकिन इनके पास कोई सोच है, यह ये अभी तक नहीं समझा पाए हैं, न ही बता पाए हैं।

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मैं ये कुछ सकारात्मक बिंदुओं के साथ, प्लस प्वाइंट्स के साथ पार्टी के लिए बड़ी ऐसैट्स हो सकता हूंँ। लेकिन मुझे लगता है कि मेरे कुछ दोस्त मुझे बंधनयुक्त रखना चाहते हैं। पिच जटिल है यदि मैं बहुत संभल करके खेलूंगा, बड़ी खुटूर-खुटूर तरीके से खेलूंगा तो हमारे प्रतिद्वंद्वियों के पास जो सकारात्मक चीजें हैं, उनके चलते पार्टी की स्पष्ट जीत कठिन हो जाएगी और यदि मैं अपने ढंग से खेलता हूंँ जो मेरा स्वाभाविक खेल है, तो मैं हालात को बदल सकता हूंँ और पूरी तरीके से अपने प्रतिद्वंद्वियों को डिफेंसिव बना सकता हूंँ। मगर हमारी जैसी बड़ी पार्टी में इतनी स्वतंत्रता किसी को दी जाएगी इस पर मेरे मन में स्वयं संदेह है, अभी मैं प्रथम चरण की यात्रा का और गहराई से विश्लेषण करूंगा, और दूसरे चरण के समाप्ति के बाद में मुझे कहां पर खड़ा रहना चाहिये इस पर मैं अवश्य कुछ सोचूंगा, इसको मैं सार्वजनिक चर्चा के लिए अपनी फेसबुक पेज में इसलिए डाल दे रहा हूंँ क्योंकि मैं अपने राज्य की राजनैतिक चर्चाओं और राजनैतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण कारक हूँ और मैं नहीं चाहता कि चाहे मेरी पार्टी हो, मेरी पार्टी का नेतृत्व हो या राजनैतिक पंडित हों, वो उनके सामने मेरा कोई आकस्मिक निर्णय आये बजाय इसके मैं अपनी मनोस्थिति को उनके साथ बांट ले रहा हूंँ। मगर इस सबके बावजूद इस यात्रा के सफलता के लिए जिन लोगों ने काम किया, जिसमें एआईसीसी की टीम, प्रदेश कांग्रेस की टीम सम्मिलित हैं, हमारे पुराने-नये सहयोगी सम्मिलित हैं, सब लोग बधाई के पात्र हैं, उनसे मेरी उपापोह उनके अभीष्ट से उन्हें वंचित नहीं कर सकती हैं।

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