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Big breaking :-सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एकल सदस्य आयोग का किया गठन जानिए क्या है मामला

राज्यपाल, मा० उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में योजित रिट पिटीशन (सिविल) संख्या 278 / 2022 सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य में मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 10.05.2022 के अनुपालन में राज्य के भीतर प्रति स्थानीय निकायों के अंतर्गत अन्य पिछडा वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति और निहितार्थी की समसामयिक कठोर अनुभवजन्य जांब (contemporaneous rigorous empirical inquiry) हेतु श्री बी०एस० वर्मा, सेवानिवृत्त मा० न्यायाधीश, मा० उच्च न्यायालय, उत्तराखण्ड नैनीताल की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय समर्पित आयोग (Dedicated Commission) गठित किये जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं।

2. उक्त आयोग निम्नलिखित Terms of Reference के आधार पर अपना प्रतिवेदन एवं अनुशंसायें राज्य सरकर को उपलब्ध करायेगी :

(i) राज्य के भीतर प्रति स्थानीय निकायों के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति और निहितार्थों की समसामयिक कठोर अनुभवजन्य जांच (contemporaneous rigorous empirical inquiry ) करना ।

(ii) अभिलेखों, रिपोर्टों, सर्वेक्षणों एवं अन्य उपलब्ध आंकडों के आधार पर राज्य की कुल जनसंख्या के सापेक्ष ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायवार अन्य पिछडे वर्ग के नागरिकों की जनसंख्या के अनुपात का विनिश्चय करना तथा गा० उच्चतम न्यायालय में योजित रिट याचिका संख्या-356 / 1994 के0 कृष्णमूर्ति बनाम भारत सरकार में दिनांक 11.05.2010, रिट पिटीशन संख्या-980 / 2019 विकास किशन राव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य में दिनांक 04 मार्च 2021 एवं रिट याचिका (सिविल) संख्या-278 / 2022 सुरेश महाजन बनाम् मध्य प्रदेश सरकार एवं अन्य में दिनांक 10.05.2022 में मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों के आलोक में राज्य सरकार को प्रतिवेदन उपलब्ध कराना

(iii) आयोग अपनी अनुशंसा / संस्तुति आयोग के गठन की तिथि से 01 वर्ष अथवा राज्य सरकार द्वारा विस्तारित की गयी अन्य अवधि के भीतर उपलब्ध करायेगा। (iv) उपरोक्त एकल सदस्यीय आयोग में सचिवीय सहायतार्थ (Secretarial Assistance)

यथा कार्यालय स्टाफ / वाहन आदि पर होने वाला व्यय निदेशक, पंचायती राज देहरादून के

प्रशासकीय मद से वहन किया जायेगा

उपरोक्त आयोग के सदस्य सचिव के रूप में श्री ओमकार सिंह, अपर सचिव, पंचायती राज विभाग, उत्तराखण्ड शासन कार्य करेंगे। (v)

(vi) वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के कार्यालय ज्ञाप दिनांक 08.10.1987 के द्वारा मा० उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की जांच आयोगों / समितियों में नियुक्त होने पर उनके वेतन नियतन तथा अन्य शर्तों के सम्बन्ध में जारी मार्गदर्शी सिद्धान्तों एवं समय समय पर संशोधित आदेशों तथा तत्क्रम में मंत्रिपरिषद अनुभाग (गोपन विभाग), उत्तराखण्ड शासन द्वारा समय समय पर जारी आदेशों के क्रम में मा० आयोग को सभी सुविधायें अनुमन्य होंगी ।

आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने हेतु :

(a) विभिन्न संगठनों / सस्थाओं / व्यक्तियों/विभागों से ऐसी सूचना अथवा आंकडे, जो भी इस हेतु आवश्यक हो अथवा प्रासंगिक हो, की मांग एवं सहयोग प्राप्त कर सकेगा।

(b) विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के साथ बैठकें आहूत करके उनकी सलाह लें सकेगा और जब भी आवश्यक हो, मान्यता प्राप्त अनुसंधान संस्थाओं से अनुभवजन्य आंकड़ों के विश्लेषण और आयोग के कुशल और प्रभावी कामकाज के लिए सहायता प्राप्त कर सकेगा।

(c) उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उत्तराखण्ड राज्य या भारत के अन्य राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों के दौरे हेतु अध्ययन भ्रमण का प्रबन्ध कर सकेगा।

 

 

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