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Big breaking:-मिलने जा रही बड़ी राहत , फिर होने जा रहा पेट्रोल डीजल सस्ता , जानिए कैसे

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने की उम्मीद है. इससे देश के घरेलू बाजारों में भी पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है एक रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक बाजार में ब्रेंट और यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) के दामों में बड़ी गिरावट देखी गई है.इन दोनों के बेंचमार्क में अभी अक्टूबर के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. इस लिहाज से दुनिया के बाकी बाजारों में पेट्रोल और डीजल के दाम घट सकते हैं. भारत में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल सकती है.

 

 

 

 

 

 

‘रॉयटर्स’ की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा है, ब्रेंट 57 सेंट या 0.72% गिरकर 78.32 डॉलर प्रति बैरल हो गया है.
यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 39 सेंट या 0.51% नीचे गिरकर 75.55 डॉलर प्रति बैरल पर चला गया है. WTI और ब्रेंट की कीमतें 1 अक्टूबर के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं. इन दोनों में शुक्रवार को लगभग 3 फीसदी की गिरावट देखी गई है.

 

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7 हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें देखें तो अभी यह 7 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर है. तेल कंपनियों ने हाल के समय में सप्लाई में वृद्धि की है. दूसरी ओर जापान ने कहा है कि कोविड महामारी के चलते यूरोप में पैदा हुई गैस की किल्लत को दूर करने के लिए वह अपने गैस खदान को खोलेगा. इन दोनों वजहों से तेलों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लुढ़कती दिख रही हैं. अगर कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ती है और जापान गैस के खदान खोल देता है तो भावी समय में पूरी दुनिया में इसका अच्छा असर दिखेगा.
अमेरिका ने जापान से आग्रह किया है कि तेल और गैसों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इमरजेंसी भंडार को खोला जाए ताकि तेजी से बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाया जा सके. अमेरिका की इस मांग के बाद जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने संकेत दिया है कि तेल और गैस के भंडार से सप्लाई बढ़ाई जा सकती है. हालांकि पूरी दुनिया को एक चिंता यह सता रही है कि कोविड की अगली लहर तेलों की मांग को फिर से प्रभावित कर सकती है.

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कोविड बढ़ने पर बिगड़ेगी स्थिति
अगर कोविड की लहर दोबारा बढ़ती है तो दुनिया के देशों में लॉकडाउन लग सकते हैं, आवाजाही पर पाबंदियां देखने को मिल सकती है. ऐसे में तेलों की मांग गिर जाएगी. मांग गिरने से सप्लाई कम होगी और इससे दुनिया के बाजारों में तेलों की कृत्रिम किल्लत देखने को मिल सकती है. कोरोना से पूर्व के हालात की तरह जब तेलों की मांग स्थिर होंगे तो कच्चे तेल की कीमतें भी स्थिर होने की संभावना है.
जर्मनी और ऑस्ट्रिया में लॉकडाउन लगाने की नौबत आ गई है क्योंकि दोनों देशों में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका है. ऑस्ट्रिया ने इस महीने की शुरुआत में ट्रैफिक पर पूर्ण पाबंदी लगाई थी जिसे बाद में खोल दिया गया था. अब दोबारा लॉकडाउन के हालात बनते दिख रहे हैं. आयरलैंड और नीदरलैंड्स में कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कह दिया गया है.

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अभी हाल में अमेरिका ने दुनिया की बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के साथ एक मीटिंग की और कहा कि तेल की इमरजेंसी सप्लाई शुरू की जाए ताकि किल्लत को खत्म किया जा सके. अमेरिका ने इसके लिए ओपेक के सदस्य देशों से भी बात की है. जापान इस पर राजी हो गया है. हालांकि जापान में इमरजेंसी भंडार से तेल की सप्लाई तभी शुरू की जाती है जब कोई प्राकृतिक आपदा हो. फिलहाल आपदा की स्थिति नहीं होने पर भी उसने सप्लाई शुरू करने पर विचार किया है.

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