Big breaking :-तो धामी के दाँव से शांत हो गया अशांति का माहौल, कुर्सी पाने की चाहत रखने वालों के बार बार क्यों टूट रहें सपने - News Height
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Big breaking :-तो धामी के दाँव से शांत हो गया अशांति का माहौल, कुर्सी पाने की चाहत रखने वालों के बार बार क्यों टूट रहें सपने

देवभूमि में पिछले कुछ समय तक चली गरमागरम राजनीतिक हलचल के बाद माहौल शांत है। सिर्फ वही लोग अशांत हैं जो नेतृत्व में बदलाव करवाने की फिराक में हैं। दबी जुबान से ही सही पर अस्थिरता को लेकर उनकी अटकलबाजी बदस्तूर जारी है।

 

 

लेकिन, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कल हट रहे हैं, परसों हट रहे हैं, उनकी कुर्सी बस 15 दिन तक ही रहेगी” उनका जोर बस इन्हीं चर्चाओं तक सीमित रह गया है। हटने हटाने की इस बहस में हर रोज उत्तराखण्ड की राजनीति के कई चेहरे सामने आ जाते हैं। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसको लेकर कभी किसी सांसद, कभी पूर्व मुख्यमंत्री तो कभी किसी विधायक का नाम हवा में तैरने लगता है। पर, अंदर और बाहर से हो रही इस साजिश के सूत्रधार हर बार औंधे मुंह गिर जाते हैं।

 

 

दूसरी ओर, धामी अबाध गति से राजकाज चला रहे हैं। वह रोजाना गतिशील हैं। आत्मविश्वास से लबरेज दिखते हैं। इसके तमाम कारण भी हैं। सबसे बड़ी वजह है कि भाजपा हाईकमान का धामी पर पूरा भरोसा है। उन पर मोदी और शाह का वरदहस्त बना हुआ है।

 

 

ज्यादा पुरानी बातों पर जाने की जरूरत नहीं है। 2021 में Pushkar Singh Dhami के पहली बार मुख्यमंत्री बनने की स्थिति पर गौर करिए। उनके सामने 2022 में सत्ता में भाजपा की वापसी सबसे बड़ी चुनौती थी, जबकि परिस्थितियां माकूल नहीं थीं। सब कुछ दांव पर लगा हुआ था, लेकिन धामी की अगुवाई में भाजपा ने इतिहास रच दिया। रवायत टूट गई। उत्तराखण्ड में पहली बार किसी दल ने लगातार सत्ता में वापसी की।

 

 

इसके ठीक दो साल बाद धामी की आजमाइश 2024 के लोकसभा चुनाव हुई। पूर्व की भांति 5-0 का स्कोर बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती था। उसमें भी टीम धामी सफल हुई। 2014, 2019 की तरह 2024 में भी स्कोर 5-0 रहा। विपक्ष का सूपड़ा साफ करने वाली इस जीत की हैट्रिक बन गई। छोटी सरकारों (निकाय और पंचायत) के गठन में भी भाजपा का दबदबा रहा।

 

 

हां ! विधानसभा के उपचुनावों में भाजपा को ऑनर्स मॉर्क्स ही हासिल हुए। धामी की सरपरस्ती में चुनाव का कोई ऐसा मोर्चा नहीं जो फतह न हुआ हो। लेकिन, चुनौतियां दूसरे तरह की रहीं। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से संचालित भर्ती परीक्षाओं में की जा रही नकल, सरकारी नौकियों का सौदा, अंकिता भण्डारी हत्याकाण्ड, हरिद्वार में अपनी नाबालिग लड़की के यौन शोषण में एक मां की संलिप्तता और कुमाऊं में डेयरी संघ के एक पदाधिकारी का महिला से दुराचार में फंसना समेत कुछ ऐसी गंभीर प्रकरण सामने आए जिनमें सीधे तौर पर भाजपा से जुड़े नेताओं के नाम उजागर हुए। लेकिन इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच और इनमें से दो प्रकरणों की सीबीआई जांच की संस्तुति करके मुख्यमंत्री धामी ने जनभावनाओं का सम्मान किया। बेशक इसे लेकर विपक्ष ने भी लड़ाई लड़ी और जबरदस्त जनदबाव भी रहा।

सामाजिक मुद्दों से हटकर प्राकृतिक आपदाओं ने भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की खूब परीक्षा ली। जोशीमठ भू धंसाव से शुरू हुआ आपदाओं का सिलसिला सिलक्यारा टनल से होते हुए धराली और फिर थराली तक पहुंच गया। इन तमाम आपदाओं में सरकार की ओर से रेस्पांस टाइम को लेकर पहले की अपेक्षा सुधार देखने को मिला। प्रभावितों की मद्द के लिए पूरी सरकारी मशीनरी झोंक दी गई। केन्द्र से भरपूर मार्गदर्शन और सहयोग मिला। धामी खुद ग्राण्ड जीरो में पहुंचकर बचाव और राहत के मोर्चे पर डटे रहे। उन्होंने पीड़ित जनता को भगवान के भरोसे नहीं छोड़ा।

 

 

सरकार से जो बन पड़ा वो किया गया। इस दौरान, मुसीबत में न घबराने के धामी के कई उदाहरण सामने आए। लेकिन दूसरी ओर, आपदा में अवसर तलाशने वाले उनके राजनैतिक विरोधी साजिशन सुपर एक्टिव रहे। उनकी मुहिम की परवाह किए बगैर धामी सलीके से हर नई मुसीबत को पार करते चले गए।

 

 

राजकाज की जिम्मेदारियों के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा के हिन्दुत्व एजेंडे पर भी स्मार्टली वर्क किया। उनकी सरकार ने हिंदुत्व एजेंडे को सख्ती से लागू करते हुए कई अहम फैसले लिये। धर्मांतरण कानून को सख्त बनाने, लैंड जिहाद और लव जिहाद पर प्रहार करने के साथ ही अवैध मदरसों व मजारों के खिलाफ अभियान चलाया गया। इसके साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने चारधाम यात्रा, मानसखंड मंदिर माला मिशन और नए धार्मिक कॉरिडोर निर्माण पर जोर दिया।

 

 

इन फैसलों के कारण पुष्कर सिंह धामी ने कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा के रूप में अपनी विशिष्ट छवि बनाई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ ही पुष्कर सिंह धामी को भी अब हिन्दुत्व पोस्टर बॉय के तौर पर पहचान मिली है। संयोग देखिए कि आने वाले समय में अगस्त 2026 में नन्दा देवी राजजात यात्रा और फिर 2027 के शुरुआत में हरिद्वार में अर्द्धकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन धामी की ही सरपरस्ती में होने हैं।

सरल स्वभाव के पुष्कर सिंह धामी इन्हीं तमाम वजहों से भाजपा हाईकमान के फेवरेट बने हुए हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि धामी राज में अब तक भ्रष्टाचार का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। खनन और शराब से जुड़े आरोप सिर्फ जुबानी तौर पर हैं। पिछले 25 वर्षों में सूबे का शायद ही कोई ऐसा मुख्यमंत्री हो जिसने खनन और शराब से संबंधित लांछन न झेले हों।

अब ये इल्जाम परम्परागत से हो चले हैं, जिन्हें सत्ता पक्ष और विपक्ष की भूमिका अदला-बदली होने पर भाजपा-कांग्रेस बारी-बारी से एक दूसरे पर जड़ते आए हैं। धामी की कुछ और भी खासियत हैं, जो उन्हें नेताओं की भीड़ से अलग करती हैं। बेवजह की बयानबाजी से दूर रहना, पक्ष-विपक्ष सभी के लिए सर्व सुलभ होना, खुद का अपना मजबूत इंटेलीजेंस सिस्टम, सुबह से ही राज्य के हर घटनाक्रम पर नजर रखना, जनसरोकार से जुड़ी लड़ाई को नाक का सवाल न बनाना जैसे कई विशिष्ट गुणों की वजह से वह आज भी भाजपा के लिए Versatile Chief Minister बने हुए हैं।

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Author: Pankaj Panwar
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