*कांग्रेसी दावे शिगूफा, वहां तो भीष्म पितामह ही कौरवों पर टूट पड़े हैं : चमोली*
*कांग्रेस प्रभारी की हरियाणा में गुटबाजी जगजाहिर, भाजपा को कुछ देकर ही जाएंगी!*
*कांग्रेस, हरदा परिवार के लिए प्लेसमेंट एजेंसी, दबाव की राजनीति है अवकाश: चमोली*
देहरादून। भाजपा ने कांग्रेस के दावों को शिगूफा बताते हुए कहा, वहां तो राजनैतिक अवकाश पर गए भीष्म पितामह ही कौरवों पर टूट पड़े हैं, पहले वे आपस निपट लें। पार्टी विधायक और प्रदेश प्रवक्ता श्री विनोद चमोली ने कांग्रेस प्रभारी के दौरे पर भी तंज किया कि उन्होंने हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी का जो हाल किया, उसे देखते हुए राज्य में भी वो भाजपा को कुछ न कुछ देकर ही जाएंगी। वहीं व्यंग किया कि हरदा के लिए कांग्रेस पार्टी एक पारिवारिक प्लेसमेंट एजेंसी है और उनका राजनैतिक अवकाश भी दबाब की राजनीति का हिस्सा है।
पार्टी मुख्यालय में मीडिया द्वारा पूछे गए कांग्रेस के ज्वाइनिंग दावों को उन्होंने शिगूफा बताते हुए हवा में उड़ा दिया। कहा, जिस तरह लगातार बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता पार्टी छोड़ कर गए हैं, उससे घर बचाने की कयावद में कांग्रेस नेता शिगूफे छोड़ रहे हैं। जिनको वे भाजपा का नेता बताकर, पार्टी में शामिल कर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे सभी तो पिछले चुनाव में ही भाजपा से निकल गए थे और आज कहीं भी सक्रिय नहीं है। जबकि सच यह है कि कांग्रेस पार्टी के लिए अब अपने नेताओं को रोके रखना असंभव हो रहा है
उन्होंने हरीश रावत को लेकर सवाल के जवाब में तंज किया कि वे तो कांग्रेस पार्टी के पितामह हैं और अब पितामह ही खुद कौरवो पर टूट पड़े हैं। ये कौरव सेना तो पितामह के संरक्षण में ही राजनीति करती आई है। ऐसे में पहले कौरवों को यह तय करना है कि वे पितामह से कैसे बचें।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हरीश रावत तो राजनीतिक अवकाश पर होते हुए भी सबसे अधिक राजनीति कर रहे हैं। दरअसल वे दबाव की राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं। पहले तिवारी सरकार में हमेशा विरोध करते रहे, फिर बहुगुणा के समय मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने पर 18 विधायकों के साथ अलग होकर अपनी पार्टी की सरकार को कमजोर करने में जुटे रहे और जब सत्ता में आए तो विरोधियों को ठिकाने लगाने में व्यस्त रहे। उनकी ऐसी करगुजारियों की वजह से 2016 में वहां से विधायक टूट कर भाजपा में आए। आज हालात यह है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को अपने परिवार के लिए प्लेसमेंट एजेंसी मान लिया है। पहले पत्नी को चुनाव लड़ाया, फिर बेटे को सक्रिय किया, फिर बेटी को टिकट दिलाया और अब दूसरे बेटे के लिए यह सारा राजनीतिक प्रपंच कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी दबाव में आए या ना आए लेकिन जनता उनकी रग रग को अच्छी तरह पहचानती है और 27 के चुनाव में भी उनके हाथ खाली ही रहने वाले हैं।
वही कांग्रेस प्रभारी के उत्तराखंड दौरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी हरियाणा में कांग्रेस पार्टी गुटबाजी में भूमिका किसी से छिपी नहीं है। पूरे विधानसभा चुनाव तो कांग्रेस नेतृत्व उन्हें मनाने में ही लगा रहा और बुरी तरह से चुनाव हारे। लिहाजा उनके आने से कांग्रेस में जारी आपसी सिर्फ फुटौव्वल और तेज हो होना तय है। नहीं आने पर बार-बार टोके जाने के बाद वे उत्तराखंड आ रही हैं ऐसे में हमें विश्वास है कि कुछ ना कुछ वह भाजपा को देकर ही जाएंगी।
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