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Big breaking:-बीजेपी नेता मनोहर कांत ध्यानी सरकार की परेशानी कम कर रहे या बढ़ा रहे , अब दिया ऐसा बयान फिर नाराज हो गए तीर्थ पुरोहित

बीजेपी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोहर कांत ध्यानी को तीर्थ पुरोहितों को मनाने के लिए जिम्मेदारी दी है लेकिन आए दिन उनका कोई ना कोई बयान तीर्थ पुरोहितों को नाराज कर दे रहा है जी हां अब मनोहर कांत ध्यानी ने एक और बड़ा बयान दिया है ध्यानी ने साफ तौर पर कहा कि देवस्थानम बोर्ड हाई पावर कमेटी चार धाम से जुड़े किसी भी व्यक्ति का अहित नहीं होने देगी। कमेटी के अध्यक्ष पूर्व राज्यसभा सदस्य मनोहर कांत ध्यानी का कहना है कि सभी का पक्ष जानने और सुनने के बाद जनहित के निर्णय दिए जाएंगे।

 

देवस्थानम बोर्ड हाई पावर कमेटी के कार्यालय का  अध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी ने उद्घाटन किया। इस दौरान बातचीत में मनोहर कांत ध्यानी ने कहा कि इस बोर्ड का काम सभी के विचारों को सुनने के बाद समस्याओं का समाधान करना है। देवस्थानम बोर्ड स्थानीय समस्याओं के समाधान, चारों धामों की धार्मिकता, सामाजिकता को बनाए रखने, इन धामों में आने वाले यात्रियों को सुख सुविधा उपलब्ध करवाएं जाने, उनकी सेवा करने के लिए गठित किया गया है। पर, कुछ लोग अपने कर्तव्य को भूल कर यात्रियों की आस्थाओं से विमुख होकर आर्थिक लाभ के लिए अपनी नैतिकता को भूल गए हैं।

 

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क्योंकि उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि धार्मिक मामलों में यदि राजनीति प्रवेश करेगी, तो उसके दुष्परिणाम होंगे। यह आस्था का विषय है, जिसे बनाए रखना सभी का कर्तव्य है। कमेटी अध्यक्ष ध्यानी ने कहा कि बदरी-केदार मंदिर समिति (देवस्थानम बोर्ड) का गठन 1941 में चारों धामों के विकास को लेकर किया गया था। इस पर सभी को विश्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1968 में बदरीनाथ के लिए मास्टर प्लान लागू किया गया था।इसके बनने के बाद किन्ही कारणों से वह लागू नहीं किया गया। अब उस पर सरकार की ओर से बदरीनाथ जाने वाले यात्रियों की आस्था को बनाए रखने के साथ विकास किया जाना है।जिसमें कुछ लोग के मकान व दुकान आड़े आ रहे हैं, जिसके भय के कारण यह विरोध किया जा रहा है।

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मनोहर कांत ध्यानी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से गठित देवस्थानम बोर्ड में सभी की भावनाओं को समाहित करते हुए उनके हकहकूकों का किसी भी तरह से हनन नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा कि कुछ लोग वहां रहकर रोजी-रोटी जरूर कमा रहे हैं, लेकिन वह वहां के हक हकूकधारी नहीं है। उनका कहना है कि यह हक सिर्फ तप्त कुंड तक ही सीमित है, जहां 600 वर्ष पहले मंदिर की स्थापना की गई थी। यहां उन लोग का कार्य मात्र यात्रा पर आने वाले यात्रियों की सेवा करना है। इस अवसर पर उच्च स्तरीय समिति अध्यक्ष के निजी सचिव वीरेंद्र उनियाल, पीआरओ नरेंद्र शर्मा, हरीश गौड़ मौजूद थे।

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मैं मनोहर कांत ध्यानी के इस बयान से तीर्थ पुरोहित खासे नाराज हैं आज केदारनाथ और बद्रीनाथ में मनोहर खान ध्यानी के खिलाफ नारेबाजी भी जमकर हुई

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