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Big breaking:-राज्य कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर , गोल्डन कार्ड को लेकर शासन ने कर दिया आदेश जारी अब ऐसे मिलेगी राहत

प्रदेश के समस्त राजकीय कार्मिकों एवं पेंशनरों को राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (SGHS) के अन्तर्गत समस्त प्रकार के रोगों की चिकित्सकीय उपचार को प्रभावी बनाये जाने एवं आयुष्मान भारत / अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना की अम्ब्रेला योजना से पृथक किये जाने के सम्बन्ध में।आदेश जारी कर दिया गया है ।

 

 

 

आयुष्मान भारत / अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के संदर्भ में पूर्व में निर्गत शासनादेश संख्या-688/X.XVIII-4-2018-04-2008 दिनांक 14.09.2018 शासनादेश संख्या 870/XXVHI-4-2018-04/2008 दिनांक 06.12.2018 शासनादेश संख्या-214 XXVIII-3-2020-03/2008T.C. दिनांक 04.05.2020 तथा शासनादेश संख्या-906/6XXVIII-3-2020 04/2008T.C. दिनांक 31.12.2020 से राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (State Government Health Scheme-SGHS) पृथक करते हुए उत्तराखण्ड राज्य के समस्त राजकीय कार्मिकों एवं पेंशनर्स को समस्त प्रकार के रोगों के उपचार हेतु उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधायें सुलभ कराये जाने हेतु राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (State Government Health Scheme SGIS) का संचालन निम्न प्रतिवन्ध

के अधीन लागू किये जाने की श्री राज्यपाल महोदय सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं – 1. योजना का नाम कार्मिक / पेंशनर्स हेतु स्वास्थ्य योजना “राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (State Government Health Scheme SGHS) के नाम से संचालित होगी।

2. योजना का विवरण राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना का संचालन राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण उत्तराखण्ड द्वारा किया जायेगा। इस हेतु राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा Central Government Health Scheme (CGIS) दरों पर राजकीय / निजी चिकित्सालयों को (SGHS) योजना से सूचीबद्ध किया जायेगा। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा उन्हीं चिकित्सालयों को सूचीबद्ध किया जायेगा, जो उनके यहा उपलब्ध समस्त विशेषज्ञता / सुविधा कार्ड धारक को उपलब्ध करायेगे। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा एकल विशेषज्ञता के ख्याति प्राप्त चिकित्सालयों को भी सूनीवस किया जायेगा।

3. पात्रता- “राज्य सरकार स्वार योजना में परिवार एवं आश्रित की परिभाषा यही होगी जो “उत्तराखण्ड सेवानिवृत्ति लाभ अधिनियम, 2018 में उल्लिखित है।

आश्रित की आयसीमा आश्रित की मासिक आय की सीमा केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) (समय-समय पर यथासंशोधित) के अनुरूप निर्धारित होगी। नोट-विकलागता का तात्पर्य न्यूनतम 40 प्रतिशत विकलांगता से है जिसकी पुष्टि विकलांगता प्रमाण-पत्र (मेडिकल बोर्ड) के आधार पर की जायेगी।

 

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण में सूचीबद्ध निजी चिकित्सालय में भर्ती होने पर (In patient) कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

८) राज्य के कार्मिकों / पेंशनर को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखण्ड चिकित्सालयों में इलाज कराने की सुविधा असीमित धनराशि तक अनुमन्य होगी।

में सूचीबद्ध

d) कार्मिकों / पेंशनर द्वारा गैर सूचीबद्ध चिकित्सालयों में चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने की

दशा में चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों के आधार पर कार्मिक / पेंशनर्स को की जायेगी। e) कार्मिक / पेंशनर्स गैर सूचीबद्ध चिकित्सालयों में कराये गये अन्तः रोगी चिकित्सा उपवार (IPD) उपचार चिकित्सा व्यय का भुगतान स्वयं करेंगे तथा उक्त व्यय की प्रतिपूर्ति का दावा निर्धारित प्रपत्र / अनिवार्यता प्रमाण पत्र पर अपने कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष /

प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो, को प्रस्तुत करेंगे।

1) गैर सूचीबद्ध चिकित्सालयों में चिकित्सकों से कराये गये अनिवार्यता प्रमाण पत्र का परीक्षण वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन के अनुसार कार्यालय अध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो, के द्वारा केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) दरों पर इस हेतु अधिकृत अधिकारी (प्रतिहस्ताक्षर कर्ता अधिकारी) से कराया जायेगा।

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परीक्षणोपरान्त कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो, के द्वारा वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा के अन्तर्गत चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे को नियमानुसार स्वीकृत कर / करा कर आहरण वितरण अधिकारी के माध्यम रो (IFMS Portal के माध्यम से ऑनलाईन) राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को भुगतान हेतु उपलब कराया जायेगा।

(B) राज्य गठन से पूर्व पेंशनर्स के गैरसूचीबद्ध चिकित्सालयों में कराये गये उपचार सम्बन्धी IPD बिलों का स्वीकृता अधिकारी सम्बन्धित कोषाधिकारी तथा उसके पश्चात सेवा निवृत्त / पेंशनर्स की चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे की स्वीकृति सम्बन्धित कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो, के द्वारा नियमानुसार प्रदान करते हुये अग्रेतर कार्यवाही की जायेगी।

h) सम्बन्धित मूल प्रलेख आहरण-वितरण अधिकारी के कार्यालय में संरक्षित रखे जायेंगे।

i) राजकीय कार्मिक एवं पेंशनर तथा उनके परिवार के सदस्य को चिकित्सा सुविधा हेतु केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) की अनुमन्यता के आधार पर शैय्या की अनुभन्यता होगी। जिसके अन्तर्गत बेड का वर्गीकरण सातवें वेतनमान में वर्णित लेवल के अनुसार 1 से 5 तक सामान्य वेड लेवल 6 हेतु सेमी प्राइवेट बैड लेवल 7 से 11 हेतु प्राइवेट वेड एवं लेवल 12 एवं उच्चतर हेतु डीलक्स बेड अनुमन्य कराई जाएगी। सी०जी०एच० एस० दरों के अन्तर्गत 04 बेड जिसमें सामान्य बेड हेतु रू0 1000/- प्रतिदिन, रोमी प्राइवेट बेड हेतु रू0 2000/- प्रतिदिन व प्राईवेट बैड हेतु रू0 3000/- प्रतिदिन और लेवल 12 व उच्चतर लेवल के लिए डीलक्स बेड हेतु रू0 4000/- की दर अनुमन्य होगी। सेमी प्राईवेट बेड प्राईवेट बेड एवं डीलक्स बेड हेतु केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों पर चिकित्सालय को भुगतान अनुमन्य होगा।

 

C. कार्मिक / पेंशनर्स गैर सूचीबद्ध OPD क्लीनिक / चिकित्सालयों में चिकित्सकों से कराये गये उपचार का चिकित्सा व्यय (परामर्श शुल्क, Diagnostics/ Radiology एवं औषधियों का करा) का गुगतान स्वयं करेंगे।

D. कार्मिकों / पेंशनर्स द्वारा उपरोक्तानुसार कराये गये उपचार का अनिवार्यता प्रमाण-पत्र

अस्पताल के उपचार करने वाले चिकित्सक / मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा तिथि एवं मोहर

सहित अभिप्रमाणित किया जायेगा। उपरोक्तानुसार शासकीय कार्मिक / पेंशनर्स उक्त व्यय की प्रतिपूर्ति का दावा निर्धारित प्रपत्र / अनिवार्यता प्रमाण पत्र पर अपने कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो की प्रस्तुत करेंगे।

1. इनके द्वारा प्रस्तुत दावे अनिवार्यता प्रमाण-पत्र का परीक्षण CGLIS दरों पर जिला / उप जिला चिकित्सालय के प्रभारी अधिकारी / मुख्य चिकित्साधीक्षक / इस हेतु नामित अधिकारी (प्रतिहस्ताक्षर कर्ता अधिकारी) से कराया जायेगा जिसे कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो के द्वारा वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन की सीमा के अन्तर्गत नियमानुसार स्वीकृत कर / करा कर आहरण वितरण अधिकारी के माध्यम से (IFMS Portal के माध्यम से ऑनलाईन) राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को भुगतान हेतु उपलब्ध कराया जायेगा। सम्बन्धित मूल प्रलेख आहरण वितरण अधिकारी के कार्यालय में संरक्षित रखे जायेंगे।

G

1. राज्य गठन से पूर्व पेंशनर्स के आउट डोर पेशेन्ट / OPD बिलों का स्वीकृता अधिकारी

सम्बन्धित कोषाधिकारी तथा उसके पश्चात सेवा निवृत्त / पेंशनर्स की चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे की स्वीकृति सम्बन्धित कार्यालयाध्यक्ष द्वारा नियमानुसार प्रदान करते हुये अग्रेतर कार्यवाही की जायेगी। चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावा स्वीकृत किये जाने से पूर्व निम्नलिखित चैक लिस्ट के अनुसार 1

औपचारिकतायें पूर्ण होना अनिवार्य होगा :

i अनिवार्यता प्रमाण-पत्र आवेदन के साथ कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो, को प्रस्तुत किया जायेगा अनिवार्यता प्रमाण-पत्र मे कार्मिकों / पेंशनरों की कर्मचारी संख्या व दूरभाष संख्या अंकित की जायेगी।

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ii. समस्त मूल बिल वाउचर की मूलप्रति संलग्न हो । समस्त बिल / चाउचर चिकित्सक द्वारा मोहर सहित सत्यापित हो।

iv. चिकित्सक / मुख्य चिकित्सा अधीक्षक / इस हेतु नामित अधिकारी द्वारा चिकित्सकीय उपचार एवं उसकी दरों का भली-भांति मूल्यांकन करते हुये सत्यापन किया जायेगा।

अनिवार्यता प्रमाण पत्र (प्रारूप परिशिष्ट- क के अनुसार प्रस्तुत करना होगा।

vi. अनिवार्यता प्रमाण पत्र में रोगी का नाम, उपचार की अवधि तथा व्यय की गयी धनराशि अंकित हो तथा व्यय विवरण संलग्न होगा।

vil. ●अनिवार्यता प्रमाण-पत्र में उल्लिखित उपचार अवधि के भीतर की ही तिथियों वाउचर्स का भुगतान किया जायेगा।

13. अन्तः रोगी चिकित्सा उपचार (IPD)

के बिल

(4) अन्त रोगी चिकित्सा उपचार हेतु केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरें मान्य होगी।

(b) उत्तराखण्ड राज्य के समस्त राजकीय कार्मिका / पेंशनर्स एवं उनके परिवार के सदस्या आश्रितों को प्रदेश के सूचीबद्ध राजकीय चिकित्सालयों तथा प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर के

एक निश्चित प्रतिशत के चिकित्सा दावों का ऑडिट भी किया जाना सुनिश्चित किया जायेगा।

14. कार्मिकों / पेंशनर्स द्वारा प्रस्तुत दानों को कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो के द्वारा राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को संदर्शित किए जाने का प्राधिकार वित्तीय हरत पुस्तिका खण्ड- एक भाग-2 1() में प्रावधानित वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन के अनुसार होगा। राज्य के बाहर कराये गये उपचार की स्वीकृति भी उक्त वित्तीय प्रतिनिधायन से शासित होंगे।

ओ०पी०डी० / आई०पी०डी० में परीक्षण / प्रतिहस्ताक्षरण तथा स्वीकृति के स्तर

क०

सं०

प्रतिपूर्ति दावे की अधिकत्तम धनराशि

1.

रू०1.5 लाखा

कार्यालयाध्यक्ष

प्रतिहस्ताक्षरकर्ता अधिकारी

(ओ०पी०डी० / आई०पी०डी०)

जिला / उप जिला चिकित्सालय के प्रभारी अधिकारी / मुख्य चिकित्साधीक्षक / इस हेतु नामित अधिकारी (प्रतिहस्ताक्षर कर्ता अधिकारी)

2.

रू० 1.5 लाख से रू0 3.00 लाख तक

3.

रू0 3.00 लाख से रू0 5.00 लाख तक

4.

रू0 5.00 लाख से अधिक

स्वीकर्ता अधिकारी

कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष जैसी भी स्थिति हो ।

विभागाध्यक्ष

निर्देशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, गढ़वाल मण्डल एवं कुमाऊँ मण्डल

महानिदेशक / निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तराखण्ड देहरादून।

तदैव

प्रशासकीय विभाग

नोट- राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अन्तर्गत सूचीबद्ध चिकित्सालयों से चिकित्सा उपचार की दशा में सम्बन्धित चिकित्सालय के मुख्य चिकित्साधीक्षक / प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षर किया जायेगा।

अपरिहार्य परिस्थिति में आकस्मिकता के दृष्टिगत गैर सूचीबद्ध चिकित्सालयों में चिकित्सकीय उपचार हेतु कार्मिक / पेंशनर के द्वारा दिये गये अग्रिम आहरण के प्रस्ताव (चिकित्सालय द्वारा उपलब्ध कराये गये आगणन के 75 प्रतिशत तक) को वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन के अनुसार विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी भी स्थिति हो, के द्वारा स्वीकृत कर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को भुगतान हेतु उपलब्ध कराया जायेगा।

15. ओ०पी०डी० अथवा अपरिहार्य परिस्थिति में गैर सूचीबद्ध चिकित्सालयों में कराये गये आई०पी०डी० उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श के बीजकों की प्रतिपूर्ति हेतु दावा अनिवार्यता प्रमाण-पत्र समस्त अभिलेखों सहित कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग / स्वीकृता अधिकारी को जैसी भी स्थिति हो (वित्तीय अधिकारों के प्रतिनिधायन के अनुसार) को उपचार समाप्ति के छ माह के अन्तर्गत प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा। उक्त अवधि से बिलम्ब की दशा में प्रतिपूर्ति दाना अस्वीकृत कर दिया जायेगा।

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4. बिना किसी सीमा के चिकित्सकीय उपवार- उत्तराखण्ड राज्य के समस्त राजकीय कार्मिकों/ पेंशनर्स एवं उनके परिवार के सदस्यों को प्रदान किये जाने वाले चिकित्सा उपचार हेतु धनराशि की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, अर्थात उपचार पर होने वाले समस्त व्यय के भुगतान की सुविधा CGLIS दरों पर प्रदान की जायेगी।

राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के अन्तर्गत उपचार हेतु (Treatment/Procedure / Surgery Package etc.) जहां CGHS दरें उपलब्ध नहीं है, की प्रतिपूर्ति AIIMS की दरों पर की जायेगी। जहां AIIMS की दरें भी उपलब्ध नहीं है, वहां चिकित्सा प्रतिपूर्ति वास्तविक व्यय की 100 प्रतिशत की दर के आधार पर किया जायेगा, क्योंकि ऐसी स्थिति Rare of the Rarest Condition में ही होगी।

5. प्रदेश में स्थित सूचीबद्ध राजकीय एवं निजी चिकित्सालय में सीधे उपचार- उत्तराखण्ड राज्य के समस्त राजकीय कार्मिकों / पेंशनर्स एवं उनके परिवार के सदस्यों एवं आश्रितों को प्रदेश में स्थित सूचीबद्ध निजी चिकित्सालय में उपचार (अस्पताल में भर्ती होने पर) हेतु किसी राजकीय चिकित्सालय से संदर्भण (Referral) की आवश्यकता नहीं है।

6.

1) सभी कार्मिकों / पेंशनरों से समान CGHS दरों पर सातवें वेतन आयोग के अनुसार अंशदान

लिया जायेगा, जिसका विवरण निम्नानुसार है: (a) वेतन लेवल 1 से 5 तक के राजकीय कार्मिकों / पेंशनर / पारिवारिक पेंशनर

250/- प्रतिमाह।

प्रतिमाह।

रू०

b) वेतन लेवल 6 राजकीय कार्मिकों / पेंशनर / पारिवारिक पेंशनर रू0 450/- (c) वेतन लेवल 7 से 11 तक राजकीय कार्मिकों / पेंशनर / पारिवारिक पेंशनर रू0 650/

प्रतिमाह। d) वेतन लेवल 12 एवं उच्चतर राजकीय कार्मिकों / पेंशनर / पारिवारिक पेंशनर रू०

1000/- प्रतिमाह।

2) नई पेंशन स्कीम (NPS) से आच्छादित कार्मिक न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा के पश्चात् सेवानिवृत्त होने पर राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना कार्ड वार्षिक अंशदान (12 माह) दे कर प्राप्त कर सकते है अथवा 10 वर्ष के अंशदान के लगभग एकमुश्त अंशदान (120 माह) दिय जाने के पश्चात् आजीवन वैधता के साथ गोल्डन कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।

(3) पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित राजकीय पेंशनर्स द्वारा मासिक अंशदान कटौती / वार्षिक अंशदान कटौती अथवा 10 वर्ष की अंशदान राशि के बराबर एकमुश्त अंशदान के भुगतान से आजीवन वैधता के साथ गोल्डन कार्ड का लाभ प्राप्त करने के विकल्प का चयन किया जा सकता है।

4) वार्षिक अंशदान वाले पेंशनर्स / पारिवारिक पेंशनर्स के द्वारा समय-समय पर दरों को पुनरीक्षित होने पर संशोधित दर से वार्षिक अंशदान दिया जायेगा परन्तु 10 वर्ष के एकमुश अशदान दिये जाने के पश्चात् प्राप्त आजीवन कार्ड के सम्बन्ध में यह लागू नहीं होगा।

7. ऐसे राजकीय कार्मिक एवं पेंशनर्स अथवा उनके पति / पत्नी जो कि अन्य केन्द्र अथवा राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं यथा केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना ई०सी०एच०एस० (भारतीय सैन्य सेवा हेतु) एवं कर्मचारी राज्य बीमा योजना इत्यादि से आच्छादित हैं, के द्वारा राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (State Government Health Scheme SGIS) में सम्मिलित होने अथवा न होन का विकल्प स्वप्रमाणित प्रपत्रों के साथ कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग, जैसी गी स्थिति हो को दिया जायेगा, जिसकी सूचना कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष / प्रशासकीय विभाग,

 

 

 

 

 

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