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Big breaking:-सरकार की कैबिनेट बैठक में हुए इस फैसले से ऊर्जा निगम के संविदा कर्मचारी नाराज , ये है मामला

राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के विभिन्न विभागों/निगमों में उपनल के माध्यम से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान वेतन व वेतन बढ़ोतरी के संबंध में कोई निर्णय ना लिए जाने से संविदा कर्मचारियों में मायूसी है।

क्योंकि इस प्रकरण विगत कई समय से लंबित रखा जा रहा है और सरकार द्वारा बार-बार यह बहाना बनाकर प्रकरण को टाला जा रहा है कि आगामी कैबिनेट बैठक में संविदा कर्मचारियों के संबंध में निर्णय ले लिया जाएगा परंतु दुर्भाग्यवश कोई ना कोई बहाना बनाकर सरकार द्वारा इस प्रकरण को लटकाया जा रहा है। एक तरफ सरकार का कहना है कि हम संविदा कर्मचारियों की मांगों के प्रति संवेदनशील है और दूसरी तरफ प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत न करना इस बात को दर्शाता है कि कहीं ना कहीं नौकरशाही और सरकार में तालमेल की कमी नज़र आती है।

उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन राज्य सरकार से मांग करता है कि जिस तरह से तेलंगाना सरकार द्वारा Transmission Power Corporation of Telangana Limited मैं कार्यरत 24000 आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया है ठीक उसी तर्ज पर ऊर्जा के तीनों निगमों में 15 वर्षों से अधिक समय से उपनल के माध्यम से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के प्रति बड़ा दिल रखते हुए श्रम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में नियमितीकरण की कार्यवाही करते हुए स्थाई समाधान की ओर बढ़े। क्योंकि वेतन बढ़ोतरी तात्कालिक रूप से लाभ दे सकती है लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है इसलिए राज्य सरकार को स्थाई समाधान की ओर बढ़ना चाहिए।

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संगठन राज्य सरकार संज्ञान में लाना चाहता है कि कोरोना महामारी के दौर में राज्य के सम्मानित विद्युत उपभोक्ताओं, अस्पतालों के साथ-साथ गैस प्लांटों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करने में ऊर्जा निगमों के नियमित व संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है कई कर्मचारियों/अधिकारियों ने इस दौरान अपनी जान तक गंवाई है। अतः जिन कर्मचारियों द्वारा फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में इस महामारी में सेवाएं दी गई सरकार द्वारा उन्हें प्रोत्साहन राशि से वंचित करने का निर्णय सही नहीं अतः संगठन राज्य सरकार से मांग करता है कि ऊर्जा निगमो के कर्मचारियों को भी एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाए।

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