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Big breaking:-हरदा के तीन तिगाड़ा का हुआ असर , एक मंच पर आना ही पड़ा बीजेपी के दिग्गजों को , क्या भाजपा आलाकमान दे पाई एकजुटता का संदेश

 

देहरादून। हरदा के तीन तिगाड़ा अभियान ने सूबे की राजनीति में इन दिनों जमकर हंगामा बरपाया हुआ है। जब से हरीश रावत ने अपना ये अभियान छेड़ा है तबसे भाजपा भी इसे लेकर असहज हो रही है। आज इसी कड़ी में भाजपा के टीपीटी यानि त्रिवेंद्र, पुष्कर और तीरथ एक मंच पर पहली बार नजर आए।

 

 

 

 

 

दरअसल, हरिद्वार रोड स्थित में आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगवाई में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन यूं तो भाजपा के चुनावी स्लोगन अभियान का शंखनाद करने और पंजाब मसले को लेकर किया गया लेकिन धामी के साथ जिस तरह त्रिवेंद्र और तीरथ भी मंच साझा करते दिखे, उससे स्पष्ट संदेश दिया गया कि चुनाव में पूरी पार्टी एकजुट है और बैरभाव भुलाकर सब पार्टी की जीत के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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ये अलग बात है कि पत्रकार वार्ता के दौरान यह बात तारी रही कि हरदा द्वारा शुरू किए गए तीन तिगाड़ा अभियान से निकल रही चिंगारियों से परेशान होकर ही तीनों को एक मंच पर लाया गया। इस दौरान मीडिया ने जब तीन तिगाड़ा को लेकर सीएम धामी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं उछालते।

 

 

 

 

 

इस पत्रकार वार्ता में न केवल टीपीटी मौजूद थे बल्कि पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भी मौजूद रहे लेकिन गौर करने लायक बात ये की प्री प्लांड रूप से आयोजित इस पत्रकार वार्ता को केवल धामी ने ही संबोधित किया। ज्यादातर धामी ने पंजाब मामले और अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाने पर ही फोकस रखा। जबकि बाकियों के मुँह सिले रहे।

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मीडिया ने जब सूर्यधार झील के मामले में जवाब पूछा गया तो भी धामी ने ही जवाब दिया। हालांकि, एक रोचक बात बताने से धामी नहीं चूके की आचार सहिंता लागू होने के बाद वैसे भी मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों के अधिकार फ्रीज हो चुके हैं। ऐसे में विभागीय मंत्री की जांच की बात के कोई मायने नहीं हैं।

 

 

 

 

तीनों की अपनी अपनी ताल

त्रिवेंद्र जब कुर्सी से उतरे तो तब तक देवस्थानम बोर्ड अस्तित्व में आ चुका था। लेकिन तीरथ ने कमान संभालते ही त्रिवेंद्र के किये कई कामों को सीधे पलटने के बयान बार बार दिए। इसमें देवस्थानम के अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में प्राधिकरणों को समाप्त करने आदि मामले शामिल रहे जबकि जब पुष्कर ने कुर्सी संभालने पर सीधे त्रिवेंद्र के फैसलों पर सवाल तो उठाये नहीं लेकिन किया वही जो तीरथ करना चाहते थे। देवस्थानम बोर्ड को उन्होंने की भंग किया और इसका लाभ भाजपा को मिलता हुआ भी दिखा। तीनों में अगर किसी ने अपने आगे वालों की बात काटी नहीं तो वे केवल त्रिवेंद्र हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर कभी भी न तीरथ और न पुष्कर को टारगेट किया।

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